रविवासरीय संगीत सभा में कर्नाटक के विनायक हुग्गन्नावार ने दी शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति
रायपुर
गुनरसपिया फाउंडेशन की 52वी संगीत सभा में रविवार को प्रात: 10 बजे से फेसबुक पर कर्नाटक के प्रसिद्ध संगीतगुरु डॉ अशोक हुग्गन्नावार के पुत्र विनायक हुग्गन्नावार ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान संगीतज्ञ पंडित लिंगराज बुआ यरूगुप्पी, पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर, पंडित बसौराज राजगुरु, पंडित नीलकांत बुआ मिराज के घराने के विनायक, डॉ अशोक हुग्गन्नावार के गंडाबन्ध शागिर्द हैं वे शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में कर्नाटक में एक युवा हस्ताक्षर भी हैं। विनायक हुग्गन्नावार जी ने अपने गायन की शुरूआत राग भटियार में विलंबित एकताल में ख्याल -साजन बिना–,से की।अंत में उन्होंने द्रुत एक ताल में निबद्ध बंदिश-मैं तो तेरो नाम जपत हूँ,गाकर अपने गायन का समापन किया। सुंदर तानों, राग की शुद्धता और लयकारी द्वारा विनायक ने श्रोताओं को मुग्ध ही कर दिया।आपके साथ तबले पर अक्षय भट्ट जी ने, हारमोनियम पर गौरीश यजी जी ने सुंदर संगत की। श्रोताओं ने खूब लाईक किया और उनके कार्यक्रम में लगातार दाद दी।अब तक गुनरस पिया की सभा में गायन,तबला-वादन,सितार-सरोद-सारंगी-संतूर वादन की प्रस्तुतियां हो चुकी हैं।युवा एवं नवोदित कलाकारों को रविवासरीय संगीत सभा के माध्यम से जन जन तक पहुचाने का कार्य संस्था द्वारा अनवरत जारी है।गुनरस पिया फाउंडेशन द्वारा कोरोना काल में देश-विदेश के कलाकारों को फेसबुक के माध्यम से कार्यक्रम प्रस्तुति हेतु अवसर दिया जा रहा है।गुनरस पिया फाउंडेशन शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार हेतु लगातार कार्य कर रहा है।कार्यक्रम के संयोजक दीपक व्यास ने यह जानकारी दी।
