अफसरों का इंटर स्टेट एक्सचेंज ऑफ नॉलेज, बिहार से सीखेंगे-सिखाएंगे
भोपाल
मध्यप्रदेश बिहार से सीखेगा कि किस तरह से खेतों का सर्वे किया जाता है। वहीं मध्यप्रदेश में खसरा-खतौनी और नक्शे किस तरह आॅनलाईन किए गए है। भू-अधिकार और ऋण पुस्तिका आॅनलाईन लेने किस तरह की कवायद की जा रही है यह बिहार राज्य मध्यप्रदेश से सीखकर उसे अपने राज्य में लागू करेगा। इसके लिए मध्यप्रदेश के अफसर बिहार दौरे पर गए हुए है। बिहार के पटना शहर में मध्यप्रदेश और बिहार राज्यों के राजस्व विभाग और भू-अभिलेख से जुड़े अफसरों की एक बड़ी बैठक हो रही है। इस बैठक में मध्यप्रदेश से आयुक्त भू अभिलेख ज्ञानेश्वर पाटिल और राजस्व विभाग के अफसर गए हुए है।
बिहार में राजस्व विभाग ने बारिश और बाढ़ से नदियों के दिशा बदलने और नदियों के आसपास की जमीनें गायब हो जाने के बाद खेतों का सर्वे कर भूस्वामियों को उनकी जमीनें उपलब्ध कराने की तकनीक विकसित की है। उन्होंने वर्ष 2014 में खेतों का एरियल सर्वे और भौतिक सत्यापन किया था। मध्यप्रदेश में भी ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में नदियों के आसपास के खेतों में यह समस्या आती है। इसलिए मध्यप्रदेश के अफसर बिहार के अफसरों से सीखेंगे कि किस तरह खेतों का सर्वे किया जाए। उसे मध्यप्रदेश में भी लागू कर इस तकनीक से भूस्वामियों के हित सुरक्षित किए जाएंगे।
मध्यप्रदेश सरकार ने अपने लैड रिकॉर्ड आॅनलाइन कर दिये हैं। खसरे, खतौनी की नकले और जमीनों के नक्शे मध्यप्रदेश में आॅनलाइन लोगों को मिल रहे है। इसके लिए राजस्व विभाग, तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। भू अधिकार पुस्तिका और ऋण पुस्तिका भी राज्य सरकार आॅनलाईन कर रही है। ये सभी दस्तावेज मध्यप्रदेश के किसान, भूस्वामी आॅनलाईन निकाल सकेंगे। इनके लिए दफ्तरों का चक्कर लगाना और लेटलतीफी से लोगों को निजात मिलने वाला है। बिहार के अपर मुख्य सचिव राजस्व मध्यप्रदेश के दौरे पर आए थे तब उन्हें ये सभी काम बेहद पसंद आए थे। उन्होंने आयुक्त भूअभिलेख ज्ञानेश्वर पाटिल को आमंत्रित किया था। इसी सिलसिले में यह बड़ी बैठक पटना में हो रही है। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक मे दोनो राज्य अपने यहां हुए राजस्व बदलाव,कम्प्यूटराईजेशन और नवाचारों को एक-दूसरे से शेयर करेंगे। इससे दोनो राज्यों में आम नागरिकों को राहत मिल सकेगी।
