स्कूल फीस नहीं भरने पर छात्रा ने किया था सुसाइड का प्रयास, अब 10वीं में किया टॉप
बेंगलुरु
स्कूल की फीस नहीं भरने पर आत्महत्या का प्रयास करने वाली छात्रा ने 10वीं कक्षा में अव्वल स्थान हासिल किया है। पैसों की कमी के कारण कर्नाटक के तुमकुरु जिले के कोराटागेरे इलाके की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा 10वीं की परीक्षा से वंचित रह गई थी, जिसके बाद उसने सुसाइड करने जैसा खतरनाक कदम उठाया। हालांकि उससे उभरने के बाद एसएसएलसी (10वीं कक्षा) की पूरक परीक्षा (सप्लीमेंट्री एग्जाम) में इस टॉप किया। छात्रा ने परीक्षा में अव्वल आकर देश भर में लाखों छात्रों को प्रेरित किया है। छात्रा ने कुल 625 में से 599 अंकों के साथ राज्य में टॉप किया है।
बता दें कि छात्रा का परिवार स्कूल की फीस का भुगतान करने में विफल रहा और स्कूल ने परीक्षा के लिए हॉल टिकट से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अब पूरक परीक्षा में छात्रा ने इतिहास रच दिया। परीक्षा के नतीजे सोमवार को घोषित किए गए थे। एक किसान की बेटी ग्रीष्मा नायक अब साइंस (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स, बायोलॉजी) के साथ किसी अच्छे पीयू कॉलेज में प्रवेश पाने की उम्मीद कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीष्मा ने कहा कि उसने साल की शुरुआत से ही बोर्ड की तैयारी शुरू कर दी थी। क्लास में शामिल नहीं होने के बावजूद क्योंकि हम कोविड -19 संकट के कारण फीस का भुगतान करने की स्थिति में नहीं थे, मेरी बड़ी बहन कीर्तना ने मुख्य विषयों में मेरी मदद की। मैंने परीक्षा से तीन महीने पहले भाषा के विषय सीखना शुरू कर दिया था, लेकिन यह जानकर मैं टूट गई कि मेरा नाम स्कूल में परीक्षा के लिए रजिस्टर नहीं है।
बता दें कि ग्रीष्मा नौवीं कक्षा तक दक्षिण कन्नड़ जिले के अल्वा के इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल की छात्रा थी। परिवार द्वारा फीस का भुगतान नहीं करने के बाद ग्रीष्मा को कथित तौर पर कक्षाओं में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी और बाद में उसका नाम दसवीं कक्षा के बोर्ड के लिए पंजीकृत नहीं किया गया था और उसे हॉल टिकट नहीं दिया गया था।
छात्रा के पिता नरसिम्हामूर्ति बीआर और मां पदमवथम्मा टीपी को उम्मीद है कि उनकी बेटी अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरी करेगी। वहीं उसके माता-पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने पंजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दो शैक्षणिक वर्षों (कक्षा IX और X) के लिए फीस का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया, जबकि नौवीं कक्षा में ग्रीष्मा के 96 प्रतिशत स्कोर किया था।
इसके बाद उन्होंने क्षेत्राधिकार के उप निदेशक सार्वजनिक निर्देश (डीडीपीआई) से अपील की, फिर ये मामला तत्कालीन प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार के पास पहुंचा। बाद में कुमार ने ग्रीष्मा के आवास का दौरा किया और उनसे वादा किया कि विभाग उन्हें एक नए परीक्षार्थी के रूप में पूरक परीक्षा देने की अनुमति देगा। वहीं अब ग्रीष्मा के टॉप करने की सूचित होने पर कुमार ने छात्रा को बधाई दी और कहा कि वो अब दूसरों के लिए एक मॉडल बन गई है।
