CS ब्रांच की सीटों में हुई बढ़ोतरी, 495 सीटों पर देंगे एडमिशन

भोपाल
प्रदेश के दस इंजीनियरिंग कॉलेज आईपीएस (इंस्टीट्यूशन प्रिफरेंस फीस) कोटे की 495 सीटों पर प्रवेश देंगे। कोरोना काल में प्रदेश की आर्थिक स्थिति काफी लचर हो चुकी है। इसके बाद भी पालक विद्यार्थियों को लोन लेकर मोटी फीस देकर इंजीनियरिंग की डिग्री कराएंगे। सीएलसी के पहले दस कॉलेज ही आईपीएस कोटे की सीटों पर प्रवेश देंगे।  विद्यार्थियों पर कम्पयूटर साइंस (सीएस) का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है।

लगातार पांच सालों से कम्प्यूटर साइंस की सीटों पर विद्यार्थी बढ़चकर प्रवेश ले रहे हैं। सीएस ब्रांच की सीटों में इजाफा हुआ है। गत वर्ष सीएस करीब 252 सीटें थीं। वर्तमान में सभी कॉलेजों ने सीएसई के साथ डाटा साइंस, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस एंड मशीन लर्निंग, साइबर सिक्युरिटी, बिजनिस सिस्टम और आईओटी ब्रांच को शामिल कर प्रवेश देंगे।

प्रदेश के 10 कालेजों ने तकनीकी शिक्षा विभाग से 20-20 हजार रुपए देकर आईपीएस की सीटें ली हैं। उक्त कॉलेजों की 495 सीटें हैं। आठ ब्रांच में प्रदेश के 10 कॉलेजों ने आईपीएस की सीटें ली थीं। इसमें सीएस की सबसे सर्वाधिक सीटें हैं इसके बाद सिविल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स एंड इलेक्ट्रिकल, आईटी, मेकेनिकल, इलेक्ट्रनिक्स एंड कम्प्यूनिकेशन, फाइयर टेक एंड सेफ्टी की गिनती की सीटें हैं।  

आईपीएस सीटों पर कमजोर पढ़ाई वाले विद्यार्थी रुपए के दम पर प्रवेश लेते हैं। वे अपनी कमजोरी छिपाने के लिए ज्यादा फीस जमा कर जेईई मैंस की काउंसलिंग को दरकिनार कर देते हैं। आईपीएस फीस से योग्य विद्यार्थी का हक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आईपीएस में कॉलेज अपनी मनमर्जी करते हैं। ऐसे में सरकार का मैनेजमेंट कोटा बंद करना एक दिखावा लगता है।  

इंजीनियरिंग में मैनेजमेंट कोटा बंद हैं। पढ़ाई में कमजोर छात्रों को बेहतर कॉलेज में प्रवेश देने और उन्हें मजबूत करने शासन ने आईपीएस कोटा बनाया है। कालेजों को ब्रांच की कुल सीटों का दस फीसदी सीटों आईपीएस कोटे के तहत लेने का अधिकार है। उन्हें ये सीटों काउंसलिंग शुरू होने के पहले विभाग से लेना होती है।

 

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