पिता व दलित नेता रामविलास पासवान की पहली बरसी पर बड़े आयोजन की तैयारी में चिराग 

 नई दिल्ली 
लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) नेता चिराग पासवान अपने पिता व दलित नेता रामविलास पासवान की पहली बरसी पर 12 सितंबर को पटना में बड़े आयोजन करने की तैयारी में हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को न्योता भेजा है। चिराग ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसे ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब चिराग पासवान की उनके चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के साथ पिता की विरासत को लेकर लड़ाई चल रही है। चिराग पासवान नई दिल्ली में चाचा पारस के आवास पर भी कार्यक्रम का न्योता देने गए। चिराग ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को भी आमंत्रित किया है। बता दें कि नीतीश कुमार और चिराग पासवान के बीच गहरे मतभेद हैं।

सूत्रों ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय ने रामविलास के निधन के बाद आवास को खाली करने के लिए शुरुआती नोटिस भेजा था, लेकिन चिराग की इस मामले पर सरकार के वरिष्ठ कार्यकारियों से मुलाकात के बाद परिवार को फिलहाल उस आवास में रहने की अनुमति दी गई। उम्मीद है कि पारस भी 8 अक्तूबर को रामविलास पासवान की बरसी पर कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। रामविलास पासवान का पिछले साल 8 अक्तूबर को निधन हुआ था। पारस द्वारा भी शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को आमंत्रित करने की उम्मीद है। जमुई के सांसद चिराग पांरपरिक पंचांग के आधार पर 12 सितंबर को बरसी का कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लोजपा के छह सांसदों में से पांच ने पारस से हाथ मिला लिया है। इसी बीच, भाजपा ने चिराग पासवान के पार्टी पर दावे को नजरअंदाज करते हुए पारस को मोदी सरकार में मंत्री पद दिया है। 

वहीं, लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने चिराग पासवान से संपर्क किया है। चिराग ने भाजपा द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार पर नाखुशी जताई है लेकिन अब तक वह भविष्य के राजनीतिक कदम पर चुप हैं। चिराग पासवान ने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता पार्टी को खड़ा करने की है। चिराग ने कहा कि उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान के तीन दशक से अधिक समय तक आवास रहे स्थान पर लगाई गई उनकी प्रतिमा उनके प्रति पार्टी के प्यार का प्रतीक है। उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह इस सरकारी आवास को अपने नियंत्रण में रखने की उनकी कोशिश है। 

चिराग ने कहा कि एक सांसद होने के नाते वह ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिसे अतिक्रमण समझा जाए या कानून का किसी तरह का उल्लंघन हो। उन्होंने कहा कि सरकारी नियम किसी सरकारी आवास को किसी संग्रहालय या स्मारक में तब्दील करने की अनुमति नहीं देते। अभी सरकार ने मुझे यहां रहने की अनुमति दी है। यह प्रतिमा दिवंगत नेता के प्रति पार्टी के प्यार का प्रतीक है और जहां भी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, इसे वहां स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इस प्रतिमा को संपत्ति पर कब्जा करने की मेरी कोशिश के तौर पर कभी नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी की योजना देश के हर जिले में उनके पिता की मूर्ति लगाने की है।

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