नपा में जब नक्शा-खसरा उपलब्ध ही नहीं तो बैंकर्स को आखिर कहां से दिया नक्शा

जांजगीर-चांपा
गेवाडीन कालोनी वैध या अवैध इस पर कुहासे के बादल छाये हुए हैं यह सब इसलिये कहा जा रहा है क्योंकि नगर पालिका जन सूचना अधिकारी ने जो सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी आवेदक को दी उसके चलते यह समस्या आन खड़ी हुई है।

प्राप्त समाचारों के अनुसार नगर पालिका सक्ती के जनसूचना अधिकारी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लगाए गए एक आवेदन के जवाब में गेवाडीन कॉलोनी से संबंधित नक्शा, खसरा और बी-1 नगर पालिका सक्ती में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी। नपा के जनसूचना अधिकारी ने सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए मूल आवेदन को सक्ती तहसीलदार को अंतरित करते हुए आवेदक को समय-सीमा में जानकारी प्रदाय करने कहा है, जबकि नगर पालिका सक्ती ने ही कुछ दिनों पहले सक्ती के सात बैंकर्स को नगर पालिका सक्ती क्षेत्रांतर्गत वार्ड क्रमांक 16 एवं 17 का परिसीमन के बाद सीमा निर्धारण के संबंध में पत्र लिखकर उक्त क्षेत्रों में मकान निर्माण किए जाने के लिए मकान ऋण दिए जाने के पूर्व में आवेदक से नगर पालिका सक्ती से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कराने संबंधी पत्र लिखा है जिसमें नगर पालिका सक्ती ने शासन के राजपत्र की छायाप्रति एवं नक्शा भी संलग्न किया । ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि नगर पालिका सक्ती के जनसूचना अधिकारी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत वार्ड क्रमांक 16 स्थित गेवाडीन कॉलोनी के मामले में आवेदक को गलत जानकारी दी है।

जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय जांजगीर के एक पत्रकार ने 22 जुलाई 2021 को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत नगर पालिका सक्ती में आवेदन प्रस्तुत करके गेवाडीन कॉलोनी निर्माण के लिए नगर पालिका सक्ती में प्रस्तुत नक्शा, खसरा एव ंबी-1 की प्रमाणित सत्यापित प्रति की मांग की थी, जिस पर नगर पालिका सक्ती के जनसूचना अधिकारी ने पृष्ठांकन पत्र क्रमांक/388/सू.अ./न.पा./2021, सक्ती, दिनांक 23/07/21 के माध्यम से आवेदक को जानकारी देते हुए कहा है कि संबंधित दस्तावेज नगर पालिका सक्ती में उपलब्ध नहीं होने एवं राजस्व विभाग से संबंधित होने के कारण सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 6(3) के अंतर्गत उनका मूल आवेदन सक्ती तहसीलदार को अंतरित किया गया है। नगर पालिका सक्ती के जनसूचना अधिकारी ने आवेदक को समय-सीमा में जानकारी प्रदाय करने के लिए सक्ती तहसीलदार को कहा है। वहीं दूसरी ओर, नगर पालिका सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने पत्र क्रमांक/258/लो.नि.वि./न.पा./2021, सक्ती दिनांक 08/07/2021 के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक सक्ती, पंजाब नेशनल बैंक सक्ती, बड़ौदा बैंक सक्ती, एक्सीस बैंक सक्ती, छग ग्रामीण बैंक सक्ती, एचडीएफसी बैंक सक्ती एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित सक्ती के शाखा प्रबंधकों से कहा है कि नगर पालिका सक्ती के वार्ड क्रमांक 16 एवं 17 का नया परिसीमन शासन द्वारा किया गया है, जो कि पूर्व में कुछ हिस्से ग्राम पंचायत सोंठी अंतर्गत आते थे, वर्तमान में वे हिस्से नगर पालिका क्षेत्र में सम्मिलित हो गए हैं। वार्ड क्रमांक 16 एवं 17 को नगर सीमा का परिसीमन किया गया, जिसका शासन द्वारा वर्ष 2019 में राजपत्र में प्रकाशन किया गया है। उक्त पत्र के माध्यम से नगर पालिका सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बैंक प्रबंधकों से अनुरोध किया है कि संबंधित क्षेत्रों में मकान निर्माण किए जाने के लिए आपके बैंक से मकान ऋण दिए जाने के पूर्व में आवेदक से नगर पालिका सक्ती से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत कराने का कष्ट करेंगे।

नगर पालिका सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बैंक प्रबंधकों को लिखे उक्त पत्र के साथ शासन राजपत्र की छायाप्रति एवं नक्शा भी संलग्न किया है, जिसकी पावती संबंधित बैंक के प्रबंधकों के अलावा ग्राम पंचायत सोंठी के सचिव से भी ली गई है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि नगर पालिका सक्ती के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने बैंक के प्रबंधकों को लिखे पत्र के साथ जब शासन राजपत्र की छायाप्रति और नक्शा संलग्न किया है तो नगर पालिका सक्ती के जनसूचना अधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत आवेदक को गेवाडीन कॉलोनी से संबंधित नक्शा, खसरा और बी-1 नगर पालिका सक्ती में उपलब्ध नहीं होने संबंधी गलत जानकारी आखिर क्यों दी गई है। बता दें कि ग्राम पंचायत सोंठी स्थित 22 एकड़ शासकीय जमीन एवं चार एकड़ 67 डिसमिल निजी जमीन को मिलाकर गेवाडीन नामक कॉलोनी बसाने के मामले में गड़बडि?ां परत-दर-परत उजागर हो रही हैं। नगर पालिका सक्ती ने नियम-कायदों को दरकिनार करके इस अवैध कॉलोनी को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए जहां सड़क, बिजली और पानी की समुचित व्यवस्था की है तो वहीं इस कॉलोनी में मकान और जमीन लेने वालों से किसी तरह का कोई टैक्स भी नहीं वसूल रही है। बताया जा रहा है कि नगर पालिका सक्ती के कुछ पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों की इस अवैध कॉलोनी में हिस्सेदारी है, इसलिए नियमों को दरकिनार कर यहां सबकुछ किया जा रहा है।

कोई टैक्स नहीं वसूल रही नगर पालिका
गेवाडीन कॉलोनी में जमीन और मकान लेने वालों से नगर पालिका सक्ती किसी तरह का कोई टैक्स नहीं वसूल रही है, जबकि सक्ती शहर के अन्य मोहल्लों की तरह ही इस अवैध कॉलोनी के लोगों को पालिका प्रशासन द्वारा तमाम् मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। इससे नगर पालिका सक्ती को सालाना लाखों का नुकसान हो रहा है। मगर, नगर पालिका सक्ती के जिम्मेदारों को इससे कोई लेना-देना नहीं है।

जमीनों का नहीं, सिर्फ मकानों का परिसीमन
ग्राम पंचायत सोंठी के सरपंच का कहना है कि ग्राम पंचायत सोंठी क्षेत्र सीमा में स्थित झूलकदम क्षेत्र, गेवाडीन चाल, जगन्नाथपुरम एवं नवीन सोंठी की जमीन पर नगर पालिका सक्ती द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर उन क्षेत्रों को नगर पालिका में सम्मिलित किया गया है तथा वार्ड क्रमांक 16 एवं 17 में जो परिसीमन बताया जा रहा है, वह केवल मकानों का है, जमीनों का नहीं किया गया है, क्योंकि अभी भी वह जमीन ग्राम पंचायत सोंठी की है। उक्त जमीनों  को पटवारियों एवं तहसीलदारों द्वारा सीमांकन नहीं किया गया है और न ही ग्राम पंचायत सोंठी को कोई सूचना दी गई है। वर्तमान में जमीनों की खरीदी-बिक्री ग्राम सोंठी के नाम से ही हो रही है।

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