कोवैक्सीन को WHO से जल्द ही मिलेगी मंजूरी, भारत बायोटेक ने जमा किए सभी दस्तावेज

नई दिल्ली

पिछले डेढ़ साल से भारत कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस दौरान कोविशील्ड और कोवैक्सीन नाम की दो भारतीय वैक्सीन बाजार में आईं। इसमें कोविशील्ड को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी, लेकिन कोवैक्सीन का मामला अटका पड़ा था। जिसके बाद से उसकी डोज लेने वाले लोग चिंता में थे। हालांकि अब उनके लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है, क्योंकि इसे भी जल्द ही WHO मंजूरी दे सकता है। कोवैक्सीन की निर्माता भारत बायोटेक के मुताबिक इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) के लिए WHO ने जितने भी दस्तावेज मांगे थे, उसे 9 जुलाई को ही जमा करवा दिया गया। अब WHO के विशेषज्ञ उन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है जल्द ही कोवैक्सीन को EUL मिल जाएगा। अभी देश में दो अन्य वैक्सीन कोविशील्ड और स्पूतनिक लोगों को दी जा रही हैं, जिनका EUL पहले से मिल चुका है।

 

EUL क्यों है जरूरी?

वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि कोरोना महामारी कहीं जाने वाली नहीं है। अगर हम पूरी जनता को वैक्सीन लगा दें, तभी इससे निजात मिल सकती है। भविष्य में एक देश से दूसरे देश यात्रा करने पर वैक्सीन सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में अगर कोवैक्सीन को EUL नहीं मिला, तो हो सकता है कि उसे लेने वाले लोग आसानी से विदेश यात्रा ना कर पाएं।

 

इन वैक्सीन को मिली है मंजूरी

जिन-जिन देशों ने वैक्सीन बनाई है, WHO की टीम उन सभी वैक्सीन की विस्तार से जांच कर रही है। अगर वो सभी पैमानों पर खरे उतर रहे तो उन्हें EUL दे दिया जा रहा है। फिलहाल अभी तक फाइजर, कोविशील्ड, मॉडर्ना, जैनसेन, एस्ट्राजेनेका और सिनोफॉर्म को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है।

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