धड़ल्ले से जारी रेत का अवैध कारोबार, प्रशासन लगाम लगाने में नाकाम
भोपाल
रेत ठेकेदारों को प्रशासन ने टैक्स भरने में किश्तों की रियायत देने के बाद अब उनके अवैध परिवहन के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया है। गौर तलब है कि बारिश के दिनों में नदियों से रेत के खनन पर रोक लग जाती है लेकिन इस दौरान अवैध रेत का खनन तेजी से होता है। इससे पहले प्रशासन ने बिना रॉयल्टी रेत परिवहन को रोकने के लिए राजधानी में 4 विशेष चेक पोस्ट बनाये थे लेकिन उसके बाद भी अवैध रेत का कारोबार नहीं रुका है। इसके तहत होशंगबाद रोड, 11 मिल समरधा, रायसेन रोड, बिलखिरिया, रातीबढ़, कोलार रोड और गोल जोड़ फॉरेस्ट चौकी में जांच नाका और चेक पोस्ट स्थापित किया गया था, लेकिन उसके बाद भी रोक नहीं लग पाई है।
नियम के अनुसार बनाए गए चेक पोस्ट पर तैनात अमले को हर सप्ताह बदला जाना चाहिए, लेकिन कोविड के चलते यहां का स्टाफ आधा गायब रहता है और इनको बदला भी नहीं जाता है। चेक पोस्ट पर पदस्थ अमले को जिला टास्क फोर्स की निगरानी में काम करना था लेकिन अब तालमेल के जरिए काम किया जा रहा है। कई बार एक ही ईटीपी पर कई डंपर नंबर प्लेट बदलकर अलग-अलग जिलों में रेत का विक्रय और परिवहन कर रहे हैं, जिससे शासन को राजस्व की हानि हो रही है। अमले को हर गाड़ी की ईटीपी चेक करनी थी लेकिन वह नहीं की जा रही है।
बारिश का दौर शुरू होते ही रेत के दामों में उछाल आना शुरू हो गई है। इससे मकान, दुकान सहित अन्य निर्माण शुरू कर चुके लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से पहले ही कई ठेकेदारों ने रेत का भंडारण कर रखा है। अब इनके खिलाफ भी प्रशासन को कार्यवाही करनी है कि जगह जगह रेत के अवैध संग्रहण पर रोक लगाई जा सके। वर्तमान में दो से ढाई गुना अधिक दाम में रेत बिक रही है। हालात यह हैं कि छोटे निर्माण कार्यों के लिए बाजार में रेत सही दामों में नहीं मिल रही है। एक डम्पर 35 से 50 हजार तक का मिल रहा है।
