‘मर्डर मेरी जान’ में 50-50 परसेंट है रोमांस और क्राइम: बरखा सिंह

‘हाउस अरेस्ट’, ‘साइलेंस..कैन यू हियर इट?’ फेम बरखा सिंह की वेब सीरीज ‘मर्डर मेरी जान’ 7 मई को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। इस वेब सीरीज और कैमरे के पीछे की कहानी के बारे में बरखा सिंह ने हाल ही में खास बातचीत में कई बातें शेयर की हैं। यह एक क्राइम बेस्ड शो है, पर इसके साथ शो में एक रोमांटिक ट्रैक भी चलता है, इसलिए मेकर्स ने सीरीज का ‘मर्डर मेरी जान’ नाम रखा है ताकि क्राइम और रोमांस का मिक्सर आॅडियंस को समझ में आए। रोमांस तो सीरीज का साइड ट्रैक है, एसीपी कॉप आदि और लुटेरी दुल्हन सोनल दोनों कैसे मिले और उनकी शादी कैसे हुई? एक चोर के साथ कॉप ने कैसे शादी की? यह बात किसी को पता है और किसी को नहीं। यह ट्रैक कुल मिलाकर रोमांस और क्राइम, फिफ्टी-फिफ्टी परसेंट पर चलता है। भोपाल में मैंने जनवरी से लेकर मिड मार्च लगभग 40 दिन तक शूट किया। मेरी मेकअप, हेयर आर्टिस्ट पूरी टीम मुंबई से गई थी। हम सब वहां एक ही होटल में रह रहे थे। जैसे-जैसे शो आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे मेरी और मेरे को-स्टार तनुज विरवानी की टीम आपस में घुल-मिल गई। पैकअप के बाद हम सब साथ बैठते थे। एक बार होटल के पूल साइड में हम सब बैठकर गप्पे मार रहे थे और म्यूजिक चल रहा था। अचानक हमारी आपस में शर्त लग गई कि कौन पूल में कूद सकता है। इस पर मैं, मेरी मेकअप आर्टिस्ट और तनुज तीनों रात ढाई बजे जिस हालात में थे, वैसे ही पूल में कूद गए। फिर होटल के मैनेजर आए उन्होंने देखा कि हम एक्टर्स हैं, तब उन्होंने हाय-हेलो बोला और सेल्फी खिंचवाकर चले गए। हम सब एक बार होटल में ही बैठे थे, उस समय रात के दो बज रहे थे। मैंने कहा, चलो रेस लगाते हैं। रात को बाहर जाकर रेस लगा नहीं सकते थे। होटल की लॉबी का कॉरिडोर लंबा था, फिर हमने वहीं रेस लगाना शुरू कर दिया था। जिस दीवार को छू कर वापस आना था, गलती से उसकी डोर बेल पर मेरा हाथ छू गया और घंटी बज गई। हम दौड़कर अपने कमरे में घुस गए। लेकिन टीम से एक लड़की जो बाहर खड़ी थी, वह पकड़ी गई जबकि वह दौड़ में शामिल भी नहीं थी। फिर हम सबने बाहर आकर उन्हें सॉरी बोला और तब वो भी हंसने लगे थे। थैंकफूली, वो डिस्टर्ब नहीं हुए क्योंकि वो लोग भी जग रहे थे। इसे किस्मत ही कहूंगी, क्योंकि हर जगह अलग-अलग चीज ट्राई करने का मौका मिला। मुझे लगता है जब मन में इच्छा होती है, तब हम कुछ भी कर सकते हैं, बस एक पैशन होना चाहिए। जब सास-बहू के सीरियल कर रही थी, तभी देखा कि वेब सीरीज पर अच्छी चीजें बन रही हैं, इसलिए इसमें भी सक्रिय होती चली गई। वैसे भी समय के साथ बदलते रहना चाहिए। ‘साइलेंस’ में मेरा पूजा चौधरी का किरदार था। जब उसका मर्डर हो जाता है, तब कहानी आगे बढ़ती है कि वो कौन थी और उसे किसने मारा। इस सब की जांच मनोज बाजपेयी करते हैं। उनके साथ मेरे ज्यादा सीन तो नहीं थे, पर एक मजेदार सीन जरूर था। उसका किस्सा कुछ यूं था कि मेरे कैरेक्टर का मर्डर हो जाता है। मैंने कभी डेड बॉडी का रोल प्ले नहीं किया था। मैंने सोचा कि बहुत इजी होगा, क्योंकि जाकर लेटना ही तो है। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा आंखों का मूवमेंट रोकना डिफिकल्ट होता है। खैर, मैं डेड बॉडी के रूप में लेटी थी और मनोज वहां आकर तहकीकात करते हैं। वे सीरियसली सीन कर रहे थे, पर मेरी आंखों की पुतलियां जब हिल जाती थी, तब उनकी हंसी भी छूट जाती थी। वे कहते कि अरे! ये कैसी लाश है? तुम क्या कर रही हो? तुम्हारी आंखों की पुतलियां हिल रही हैं। खैर, हंसी-मजाक के बाद उन्होंने मुझे मरने की बहुत अच्छी टिप्स दी। बताया कि जब मरने की एक्टिंग करते हैं, तब आई बॉल को ऊपर नहीं करना चाहिए। इससे आंखों पर जोर पड़ता है और वो हिलने लगती हैं। आई बॉल को नीचे ले जाकर देखो। फिर ऐसा किया तो एक ही टेक में सीन ओके हो गया। फिलहाल, यह ‘साइलेंस’ में नहीं रखा गया, पर हंसी-मजाक में वो मुझे बहुत बड़ी टिप दे गए।

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