टूटन का हवाला देकर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की डिमांड

भोपाल
धान खरीदी के बाद टूटन के नाम पर धान की किस्मों में बदलाव के लिए जोर लगा रहे प्रदेश के धान मिलर्स की मांगों से अब सरकार ने किनारा करना शुरू कर दिया है। सरकार पर चार से आठ गुना प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का दबाव बना रहे मिलर्स के फैसले से नाराज सरकार ने तय किया है कि अब चालू साल में धान के उपार्जन और निस्तारण के लिए दूसरे स्टेट के मिलर्स को टेंडर बुलाकर मौका दिया जाएगा।

दरअसल दो माह पहले प्रदेश के धान मिलर्स व्यापारियों का संगठन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिला था। इसमें मिलर्स द्वारा प्रोत्साहन राशि 25 रुपए प्रति क्विंटल से बढाकर 50 रुपए किए जाने का अनुरोध किया गया था जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी। इसके बाद अब मिलर्स द्वारा धान के टूटन का हवाला देते हुए नुकसान होने की बात कही जाने लगी है और अब प्रोत्साहन राशि 100 एवं 200 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की है। शासन द्वारा इसके लिए बनाई गई मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने मिलर्स की इस मांग को मानने से इनकार किया है।

उपसमिति ने मिलर्स से अन्य राज्यों का स्टेटस पता करने के बाद कहा कि यह प्रोत्साहन राशि उत्तर प्रदेश में 20 रुपए प्रति क्विंटल, छत्तीसगढ़ में अरवा और उष्णा चावल के लिए 20, 40 और 45 रुपए प्रति क्विंटल, आंध्र प्रदेश में सार्टेक्स चावल के लिए 60 एवं अच्छे चावल के लिए 50 रुपए प्रति क्विंटल है। अन्य राज्यों की तुलना में 100 एवं 200 रुपए की प्रोत्साहन राशि की डिमांड व्यवहारिक रूप से बहुत अधिक है। इसलिए मिलिंग के लिए अन्य राज्यों के मिलर्स को आमंत्रित किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि जहां तक टूटन का प्रश्न है टूटन अन्य राज्यों में भी होगी।

अफसरों के मुताबिक राज्य शासन द्वारा समय-सीमा में धान उपार्जन के दौरान मिलिंग शुरू करने के लिए नीति बनाई गई। प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने के साथ ही प्रतिभूति राशि 60 से 70 प्रतिशत की गई। मिलर्स द्वारा धान/चावल गोदाम से मिल तक ले जाने एवं लाने के लिए परिवहन की दरें निर्धारित की गईं। धान की लोडिंग अनलोडिंग करने के लिए दरें जारी की गई। पूर्व में यह लोडिंग-अनलोडिंग का प्रावधान नहीं था। इसके अलावा मिलर्स को समय पर भुगतान किया जा सके, इसके लिए देयकों के आॅनलाइन बिलिंग का प्रावधान किया गया। इसके बाद भी मिलर्स अड़े हैं।

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