13 अप्रैल से गांव-गांव पहुंच किसानों से मिलेंगे संघ कार्यकर्ता

भोपाल
जमीन और किसान से और व्यापक स्तर पर जुडने के लिए राष्टÑीय स्वयं सेवक (आरएसएस) संघ 13 अप्रैल से अपने सबसे बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। इस अभियान के तहत संघ गांव-गांव पहुंचकर भूमि संरक्षण का काम करेगा। इससे किसानों ने भी उसका सीधा जुड़ाव होगा। इसके लिए संघ ने बड़ी संख्या में अपने स्वयं सेवक भी तैयार कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि संघ की ओर से अब तक चलाए गए अभियानों में ये सबसे बड़ा अभियान है। ये अभियान मध्यप्रदेश सहित तमाम अन्य राज्यों में चलाया जाएगा। इस अभियान को भू संरक्षण का नाम दिया गया है, जो कई चरणों में चलेगा।    

आरएसएस अपने इस भू-संरक्षण अभियान की शुरुआत गुड़ी पड़वा 13 अप्रैल से करेगा। इसके तहत सभी गांवों तक पहुंचकर एक भूमि पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। भूमि पूजन के बाद किसानों को मृदा संरक्षण के विषय में जानकारी दी जायेगी और उनसे अपने खेतों में उर्वरकों की जगह जैविक खादों का उपयोग बढ़ाकर कृषि में करने के लिए प्रेरित किया जायेगा। पहले चरण में यह अभियान 24 जुलाई को गुरुपूर्णिमा तक चलाया जायेगा।

करीब चार महीने तक चलने वाले प्रथम चरण में इस संगठन से जुड़े लोग ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर किसानों को रसायनों से हो रही खेती के नुकसान समझाएंगे। उन्हें यह बताया जाएगा कि किस प्रकार रासायनिक खेती पहले तो उन्हें ज्यादा उपज का लालच देती है, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके ही खेतों की उर्वरता नष्ट करती है।

इससे खेतों में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कम होती जा रही है। इसके साथ ही किसानों को कृषि कानून के बारे में भी अवगत कराया जाएगा।

आरएसएस ने इस कार्यक्रम की वृहद पहुंच निश्चित करने और सभी वर्गों में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए अनेक धमार्चार्यों और स्वयं सेवी संगठनों को भी इसके साथ में जोड़ा है। इसमें आचार्य बालकृष्ण, सद्गुरु जग्गी वासुदेव, चिन्मय पांड्या जैसे दर्जनों लोग शामिल हैं।

इस कार्यक्रम को शुरू करने के पीछे उद्देश ये है कि देश की मृदा का बहुत तेजी के साथ क्षरण हो रहा है, जिसे समय रहते बचाना बेहद आवश्यक है, अन्यथा एक समय ऐसा आएगा कि देश के सामने खाद्यान्न का संकट दोबारा खड़ा हो सकता है। इससे बचने के लिए खेतों में रसायनों का उपयोग घटाने और जैविक तरीकों से खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है।

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