चिंतन बैठक: प्रभार के जिलों की दूरी बनी मंत्रियों के लिए परेशानी

भोपाल
पचमढ़ी चिंतन बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मेहनत की पराकाष्ठा के मैसेज के बीच कई मंत्रियों ने सीएम से प्रभार के जिलों में बदलाव की मांग रख दी है। दो या अधिक जिलों के प्रभार संभालने वाले मंत्रियों की यह डिमांड अत्यधिक सफर से बचने और विधानसभा में सक्रियता के मद्देनजर सामने आई है। सीएम शिवराज ने हालांकि ऐसे सुझावों पर तात्कालिक तौर पर कोई आश्वासन नहीं दिया है पर माना जा रहा है कि कुछ मंत्रियों के प्रभार के जिलों में संशोधन हो सकता है। पचमढ़ी चिंतन बैठक में यह मसला रविवार को दोपहर में उठा जिसमें प्रभार के जिलों पर चर्चा के दौरान सीएम चौहान ने जहां उन्हें प्राथमिकताएं बताईं वहीं मंत्रियों ने भी मौका देखकर अपनी परेशानी बता दी।

सूत्रों के अनुसार कुछ मंत्रियों ने कहा है कि उनके पास दो या अधिक जिलों का प्रभार है और इनके बीच तथा उनके अपने विधानसभा के बीच अत्यधिक दूरी के कारण महीने में 10 से 15 दिन सफर में ही बीत जाते हैं। कुछ मंत्रियों को तो दस से 12 घंटे का सफर एक साथ करना होता है। इससे अधिकतम समय गाड़ी में बीतता है जो शारीरिक थकावट बढ़ाता है। ऐसे मंत्रियों ने सीएम से आग्रह किया है कि उनके प्रभार के जिलों की दूरी कम करने पर विचार किया जाए या फिर दो जिलों का प्रभार होने की दशा में आस-पास के जिलों का ही प्रभार सौंप दिया जाए ताकि एक साथ विजिट कर प्रभारी मंत्री के दायित्व निभा सकें। गौरतलब है कि इसी बैठक में सीएम चौहान ने कहा था कि शरीर थकता है लेकिन काम की तड़प नहीं थकती। इसलिए दिन रात काम कर पाते हैं और देश के इतिहास में सबसे लंबी चलने वाली कैबिनेट बैठक संभव हो पाती है। इसी के जरिये जनकल्याण के कार्यों का धरातल पर उतारना साकार हो पाता है।

इन मंत्रियों के प्रभार के जिले काफी दूर
जिन मंत्रियों के प्रभार के जिले काफी दूर हैं, उनमें बृजेन्द्र प्रताप सिंह के पास नर्मदापुरम, सिंगरौली, जगदीश देवड़ा के पास कटनी, उज्जैन, ओपी सखलेचा के पास छतरपुर, सिवनी और मोहन यादव के पास डिंडोरी और राजगढ़ जिलों का प्रभार होना शामिल है। इसके अलावा मंत्री विश्वास सारंग टीकमगढ़, विदिशा, तुलसी सिलावट हरदा, ग्वालियर, रामकिशोर कावरे पन्ना, उमरिया जिलों के प्रभारी मंत्री हैं और प्रभार के जिले उनके विधानसभा क्षेत्र से काफी दूर हैं। इन मंत्रियों का कहना है कि ऐसे में वे अपने विधानसभा क्षेत्र में भी पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं।

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