धार्मिक नगरी में आस्था के मुद्दे की होगी परख, 31 सीटों पर भाजपा,सपा और बसपा किसका कितना फायदा

 लखनऊ

यूपी विधानसभा चुनाव अब धार्मिक नगरी में पहुंच चुका है। अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट और मिर्जापुर यूपी के प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं। भाजपा के एजेंडे में यही धार्मिक केंद्र हमेशा से रहे हैं। मगर, इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ सपा हो या बसपा या फिर कांग्रेस…। सभी के एजेंडा में धार्मिक केंद्र रहा है। धार्मिक नगरी में कुल 31 सीटें हैं। इन सीटों पर अब सभी पार्टियों की आस्था की परीक्षा होगी और पता चलेगा किसको कितना फायदा मिला।

भाजपा ने लहराया था परचम
वर्ष 2017 के चुनाव में देखा जाए तो सर्वाधिक 28 सीटें भाजपा ने जीती थी। बसपा को दो और सपा को मात्र एक सीट पर संतोष करना पड़ा था, मगर वर्ष 2012 के चुनाव में सपा ने 17 सीटें जीती थी। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक नगरी से ही अधिकतर ने अभियान की शुरुआत की। बसपा ने ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए अयोध्या से ही इसकी शुरुआत की। सपा मुखिया अखिलेश यादव भी मथुरा गए। अब देखना होगा कि पार्टियों को उनके प्रयासों में कितनी सफलता मिलती है।

पांचवें चरण में मतदान होना है
अयोध्या की पांच सीटे हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने सभी पांचों सीटों पर जीत का परचम लहराया था। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा सिर्फ रुदौली की सीट जीत पाई थी और शेष चारों सीटें सपा ने जीती थी। चित्रकूट की दो सीटों चित्रकूट और मानिकपुर में वर्ष 2017 में भाजपा ने दोनों सीटें जीती थीं। वर्ष 2012 में चित्रकूट सपा तो मानिकपुर बसपा के खाते में गई थी। इलाहाबाद में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में तीन सीटें छोड़कर नौ सीटें भाजपा व उसके सहयोगी दल ने जीती थी। सोरांव अपना दल, प्रतापपुर व हंडिया बसपा व करछना सपा जीती थी। वर्ष 2012 के चुनाव में नौ सीटें सपा जीती थी। करछना व इलाहाबाद पश्चिम बसपा व इलाहाबाद पूर्व कांग्रेस जीती थी।

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