पाकिस्तान SCO बैठक में भी बेनकाब होगा, भारत सहित कई देश तालिबानी सरकार के पक्ष में नहीं

नई दिल्ली
कई महत्वपूर्ण सम्मेलनों के बाद अब एससीओ शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान के मुद्दा काफी महत्वपूर्ण रहेगा। शिखर सम्मेलन 16 से 17 सितंबर तक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में वर्चुअल माध्यम से होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमे शामिल होंगे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी वर्चुअली मौजूद रहेंगे। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और अन्य मध्य एशियाई देशो की भी मौजूदगी होगी। सूत्रों के मुताबिक, सबसे महत्वपूर्ण ये देखना होगा कि एससीओ में पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा प्राप्त अफगानिस्तान का बैठक में कोई प्रतिनिधि होता है या नहीं। सूत्रों ने कहा कि भारत सहित कई देश तालिबान शासन की मौजूदगी इस फोरम पर नहीं चाहते। क्योंकि यह एक तरह से उन्हें मान्यता देने जैसा होगा। हालांकि चीन का रुख अभी साफ नही है।

भारत, रूस सहित 8 देश SCO के सदस्य
ताजिकिस्तान इस समय समूह का अध्यक्ष है। समूह में आठ सदस्य देश हैं रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान और चार मध्य एशियाई देश, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान। मंगोलिया, बेलारूस, अफगानिस्तान और ईरान समूह में पर्यवेक्षक राष्ट्र के रूप में हैं। जबकि आर्मेनिया, अजरबैजान, तुर्की, कंबोडिया, नेपाल और श्रीलंका को संवाद भागीदार का दर्जा प्राप्त है।

अफगान संकट के बीच हो रही है बैठक
बैठक का महत्व इसलिए है क्योंकि यह अफगानिस्तान संकट की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इसके पहले ब्रिक्स,यूएन व कई द्विपक्षीय व बहुपक्षीय फोरम पर अफगानिस्तान का मुद्दा छाया रहा है। भारत इस समय सभी अंतरराष्ट्रीय मंचो पर आतंकवाद की नई परिस्थिति को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहा है। एससीओ में भी ये मुद्दा जोर शोर से उठना तय है। पिछले दो महीनों में दुशांबे में एससीओ विदेश, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की कई बैठकें हुई हैं। एससीओ बैठक में संगठन की अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करने और कोविड महामारी के बीच व्यापार के सकारात्मक माहौल का निर्माण करना व आर्थिक सहयोग का विस्तार जैसे एजेंडे पर भी चर्चा होगी। सूत्रों ने कहा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई अफगान भागीदारी होगी, क्योंकि अफगानिस्तान समूह का एक पर्यवेक्षक सदस्य देश है। यदि काबुल में शासन परिवर्तन नहीं हुआ होता, तो अशरफ गनी बैठक में प्रतिनिधित्व करते। सूत्रों के मुताबिक, गनी ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद स्थितियां बदल गई हैं। तालिबान को लेकर दुनिया के विभिन्न देशों और एससीओ में भी गंभीर मतभेद हैं। अभी शासन की वैधता भी अंतरराष्ट्रीय पैमाने पर तय होना बाकी है।

इमरान खान का हो रहा है विरोध
उधर, तालिबान का मुखर समर्थन करने की वजह से तजाकिस्तान में स्थानीय लोग एससीओ बैठक में इमरान खान की मौजूदगी का विरोध कर रहे हैं। पंजशीर में पाकिस्तान के दखल से तजाकिस्तान के लोग नाराज हैं। सूत्रों ने कहा बैठक में भारत भी पाकिस्तान द्वारा आतंक को दी जा रही शह को बेनकाब कर सकता है। एक समूह के रूप में एससीओ यूरेशियन महाद्वीप के 60 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो कि 34 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक है, जिस पर तीन अरब लोग, यानी दुनिया की आबादी का लगभग आधा हिस्सा है।
 

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