मुख्यमंत्री के निर्देश पर ग्राम भातमाहुल में डिप्टी कमिश्नर की संयुक्त टीम पहुँची जाँच करने

बिलासपुर
ग्राम पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीणों ने मिल कर की थी मुख्यमंत्री के पास शिकायत वही जाँच अधिकारी पत्रकारों के सवाल से बचते नजर आये। पूरा मामल जैजैपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भातमहुल का है जहाँ बिलासपुर संभाग के डिप्टी कमिश्नर अर्चना सिंह, शक्ति एसडीएम जैजैपुर जनपद सीईओ रोमा श्रीवास्तव,जैजैपुर तहसीलदार चंद्रशिला जायसवाल , हल्का पटवारी राजेंद्र चंद्रा ,हसौद थाना प्रभारी सहित संयुक्त दल बल जाँच करने पहुँचे थे।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम के ही उपसरपंच राजकुमारी चंद्रा और ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री व पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री को लिखित शिकायत किया था कि उनके ग्राम पंचायत भातमाहुल के सरपंच ने ग्राम योजनाओं में अनेक अनियमितताओं के साथ-साथ शासन प्रशासन को गुमराह कर कार्य के पैसों का हेरफेर और भ्रष्टाचार किया है उन्होंने अपने शिकायत में करीब 19 बिंदुओं के साथ आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा,गरुवा,घुरवा और बारी योजना के अंतर्गत 3 वर्ष पूर्व गोठान निर्माण किया गया था जिसमें गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर खरीदी हेतु किसानों का पंजीयन नहीं किया गया है जिसमें किसानों को गोबर खरीदी बिक्री नहीं हो पा रहा है साथ ही साथ जानवरों के लिए चारा,पैरा,पानी आदि की व्यवस्था नहीं की जा रही है।

दूसरा आरोप ये था कि सरपंच सचिव के द्वारा गांव के 9 लोगों का शासकीय जमीन में अतिक्रमण कर आवास निर्माण कराया गया है जिसमें से 2 लोगों का आवास स्कूल के अहाता के अंदर है इतना ही नहीं ग्राम पंचायत के मतदाता सूची प्रकाशन के समय सरपंच एवं उसके पुत्र विजय चंद्रा के द्वारा सचिव मनाराम को डरा धमका कर गलत तरीके से मतदाता सूची तैयार कर जमा किया गया था जिसकी लिखित बयान जनपद सीईओ को दिया गया था।

उन्होंने सरपंच पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह भी बताया कि सरपंच व सचिव के द्वारा अपने 11 चहेते लोगों को जिनका पूर्व में पक्का मकान था उनका भी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत फर्जी तरीके से आवास स्वीकृत कर दिया गया है जिसकी वह जांच करवाने की मांग कर रहे हैं।उपसरपंच राजकुमारी चंद्रा ने यह भी बताया कि सरपंच और सचिव के द्वारा ग्राम पंचायत के सामान्य सभा की बैठक दिनांक 21/05/2020 को बिना विधिवत बैठक लिए मात्र 3 पंचों का हस्ताक्षर कराकर लगभग 3000000(तीस लाख) रूपए का आहरण करने का अवैध प्रस्ताव पारित किया गया था। उपसरपंच राजकुमारी ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत सरपंच व रोजगार सहायक एवं अन्य ग्रामीणों के द्वारा हरे भरे 34 पेड़ो को कटा गया है जिसमें हसौद तहसीलदार के द्वारा जांच के दौरान दोषी पाया गया है उनका भी आज तक कार्यवाही नहीं हुआ है। इसके अलावा और अन्य कई आरोपों के आधार पर जांच टीम जांच करने पहुंची थी। वही जब मीडिया ने जांच अधिकारियों से बात करने व जांच के संदर्भ में बात करनी चाही तो सभी को दरकिनार करते हुए वहां से चलते बने और तो और किसी प्रकार का बयान देने से भी इंकार कर दिया।

 

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