25 मंत्रालयों के साथ सरकार बनाएगा तालिबान, सरकार के ऐलान में हो रही है देरी

काबुल
तालिबान के सुत्रों ने पहले दावा किया था कि जुम्मे की नमाज के बाद अफगानिस्तान में नई सरकार का ऐलान किया जाएगा, लेकिन शुक्रवार को तालिबान की नई सरकार की घोषणा नहीं हो पाई। अब आज तालिबान के अफगानिस्तान में अपनी 'नई सरकार' की घोषणा करने की संभावना है। लेकिन, 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद आखिर अब तक तालिबान अफगानिस्तान में सरकार क्यों नहीं बना पाया है?
 
तालिबानी सूत्रों के मुताबिक, तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर नए अफगान शासन का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। जिसमें तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब शामिल होगा। मुल्ला याकूब के साथ सरकार में वरिष्ठ पदों पर शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकजई भी शामिल होगा। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के सर्वोच्च धार्मिक नेता हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा इस्लाम के ढांचे के भीतर धार्मिक मामलों और शासन पर ध्यान केंद्रित करेगा। लेकिन, माना जा रहा है कि तालिबान के अंदर भी सरकार बनाने को लेकर फूट पड़ चुकी है और तालिबान, जो कि अलग अलग आतंकी संगठनों की मदद से अफगानिस्तान पर कब्जा करने में कामयाब हो सका है, उनमें सरकार बनाने को लेकर काफी मतभेद है। वहीं, पंजशीर ने तालिबान की नाक में दम कर रखा था।
 
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक आतंकवादी संगठन तालिबान की सरकार में 25 मंत्रालयों का गठन किया जाएगा, जिसमें 12 मुस्लिम विद्वानों की सलाहकार परिषद या शूरा शामिल होंगे। तालिबान के वरिष्ठ सत्र के मुताबिक, तालिबान ने अभी तक दूसरे अफगान नेताओं के साथ मिलकर एक आम सहमति के आधार पर सरकार बनाने की बात की थी, लेकिन अफगानिस्तान में अब जो अंतरिम सरकार बन रही है, उसमें केवल तालिबान सदस्य शामिल होंगे। उस सरकार में फिलहाल बाहरी लोगों को जगह नहीं दी जाएगी। इसके अलावा हक्कानी नेटवर्क भी सरकार में शामिल होगा।

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