अब रायबरेली पर भाजपा की नजर, सोनिया गांधी के गढ़ में सेंध से दिए बड़े संकेत

रायबरेली नई दिल्ली
क्या अमेठी लोकसभा सीट से राहुल गांधी को हराने के बाद भाजपा अब रायबरेली में सोनिया गांधी के खिलाफ फील्डिंग जमाने में लगी है? हाल ही में भाजपा की ओर से रायबरेली के दो कांग्रेसी विधायकों को पार्टी में शामिल किए जाने से ऐसा ही संकेत मिल रहा है। एक तरफ भाजपा ने रायबरेली सदर सीट की विधायक अदिति सिंह को पार्टी में शामिल किया है तो वहीं हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह भी योगी की लीडरशिप में आस्था जताते हुए भगवा दल का हिस्सा बन गए हैं। इसके अलावा सरेनी, बछरावां और सलोन विधानसभा सीट पर पहले से ही भाजपा का कब्जा था। हालांकि इसी साल मई में सलोन से विधायक दल बहादुर कोरी की मौत के बाद से यह सीट खाली है। वहीं ऊंचाहार विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के नेता मनोज पांडेय विधायक हैं। इस तरह रायबरेली में अब कांग्रेस का कोई विधायक नहीं बचा है। यह 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को बड़ा झटका है। यही नहीं 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भी सोनिया गांधी और कांग्रेस की चिंताओं को बढ़ाने वाला है। रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह भले ही राजनीति में नई हैं, लेकिन उनके पिता अखिलेश सिंह कई बार यहां से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। इससे समझा जा सकता है कि उनका दबदबा किस कदर था। अब उनकी विरासत को अदिति सिंह ने मजबूती से संभाला है और अच्छा संपर्क रखने वाली नेता मानी जाती हैं। साफ है कि उनकी एंट्री से भाजपा को रायबरेली विधानसभा सीट पर ही नहीं बल्कि लोकसभा में भी मदद मिलेगी।

2014 के आम चुनाव में कम था सोनिया गांधी की जीत का अंतर
वहीं राकेश प्रताप सिंह की बात करें तो वह भाजपा के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के छोटे भाई हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने 2019 में सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें कड़ी चुनौती दी थी। इस बार सोनिया गांधी की जीत का अंतर 1 लाख 67 हजार ही था, जो पहले तीन लाख के पार हुआ करता था। 2004 से ही सोनिया गांधी इस सीट पर जीतती आ रही हैं, लेकिन अब नए बने समीकरण उनके लिए मुश्किलें पैदा करते दिख रहे हैं। दिनेश सिंह ने उनके मुकाबले 367740 वोट पाकर दिखा दिया था कि भाजपा अब पहले जैसी स्थिति में नहीं है। साल 2014 में सोनिया ने 3 लाख 52 हजार वोट से चुनाव जीता था।

सोनिया के करीबी थी दिनेश प्रताप, जिले के हर क्षेत्र में मजबूत हो रही भाजपा
दिनेश प्रताप सिंह कभी सोनिया गांधी के करीबी हुआ करते थे और उनका परिवार रायबरेली जिले में खासा प्रभाव रखता रहा है। उनकी भाजपा में एंट्री के बाद से ही जिले की सियासी हवा बदली दिख रही है। पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सरेनी, सलोन और हरचंदपुर की सीट अपने दम पर जीतकर चौंका दिया था। अब दो अन्य विधायकों की एंट्री के बाद वह खासी मजबूत होकर उभरी है। इसके अलावा एक दौर में ऊंचाहार सीट भी स्वामी प्रसाद मौर्या की राजनीति का केंद्र रही है, जो अब भाजपा सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में पूरे रायबरेली में ही भाजपा की मजबूत उपस्थिति देखी जा रही है, जो 2022 के विधानसभा चुनावों के अलावा अगले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी लग रहा है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *