‘नजरबंद शिविरों’ में उइगर मुसलमानों पर जुल्म ही जुल्म; सीक्रेट कैमरे में कैद हुई चीन की काली करतूत

 नई दिल्ली

पूरी दुनिया के मुस्लिमों का ठेकेदार बनने वाला पाकिस्तान भले ही चीन की जी हुजूरी कर ले, मगर हकीकत यही है कि ड्रैगन उइगर मुसलमानों को देखना ही नहीं चाहता। चीन शिनजियांग प्रांत के नजरबंदी शिविरों में उइगर मुस्लिमों के साथ भयानक व्यवहार कर रहा है और उस पर जुल्म ढा रहा है। चीन के खिलाफ ताजा और पुख्ता सबूत सामने आए हैं, जो उइगर मुसलमानों की निगरानी, डर और उत्पीड़न को दर्शाता है। चीन में एक कार्यकर्ता ने खुफिया तरीके से नजरबंदी शिविरों में चीन की काली करतूतों का खुलासा किया है।

कार्यकर्ता गुआन गुआन ने चीनी हैवानियत का 20 मिनट लंबा एक वीडियो शूट किया है, यह वीडियो इस क्रूर वास्तविकता को दिखाता है कि कैसे शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली सरकार उइगरों पर अत्याचार कर रही है। वीडियो को अक्टूबर की शुरुआत में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। बता दें कि चीन पर अक्सर आरोप लगते रहते हैं कि वह उइगर मुसलमानों के संग हैवानियत से पेश आता है। उनकी इबादत से लेकर रहन-सहन सबकुछ में दखल देता है।

रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुआन ने कहा किक चीनी सरकार के प्रतिबंधों के कारण विदेशी पत्रकार साक्षात्कार के लिए शिनजियांग तक मुश्किल से पहुंच पाते हैं। वीडियो की शुरुआत में वह कहते हैं कि चीनी सरकार ने शिनजियांग प्रांत में नजरबंदी शिविर स्थापित किए हैं, जहां स्थानीय जातीय अल्पसंख्यकों यानी उइगरों और चीनी सरकार से मतभेद रखने वाले असंतुष्टों को बिना किसी मुकदमे के कैद किया जाता है।

 रिपोर्ट के अनुसार, शिनजियांग की अपनी यात्रा के दौरान गुआन ने कुल आठ शहरों की यात्रा की और 18 ऐसे नजरबंदी शिविरों की खोज की। इनमें से कई कैंपों के बारे में नक्शे पर कोई नामो-निशान नहीं था। मगर उन्होंने कांटेदार तारों, गार्ड टावर, पुलिस चेकप्वाइंट, आर्मी बैरक, सेना की गाड़ियों और जेल के भीतर की दीवारों पर बने निशानों को रिकॉर्ड किया।

पूर्वी शिनजियांग के हामी में गुआन ने हामी कंपल्सरी आइसोलेटेड ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर की यात्रा की, जिस पर उन्हें संदेह है कि यह एक नजरबंद शिविर है। रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दूसरी ओर उरुमकी में, उन्होंने देखा कि कई इमारतें थीं, जिनमें वॉचटावर और ऊंची बाड़ थी, जिसके ऊपर कांटेदार तार लगे थे। उनका मानना है कि यहां कई नजरबंदी शिविर हैं और सभी में मौजूद वॉचटावर से उन पर निगरानी की जाती है।

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