IPS की साढ़े चार दशक पुरानी पूरी, गृह मंत्री मिश्रा ने कहा अपराधों के नियंत्रण में मिलेगी मदद
भोपाल
पुलिस कमिश्नर सिस्टम में इन दोनों शहरों में एडीजी या आईजी रेंक के अफसर को कमिश्नर आॅफ पुलिस बनाया जा सकता है। इसके बाद डीआईजी रैंक के अफसर को ज्वाइंट कमिश्नर आॅफ पुलिस बनाया जा सकता है। वहीं एसपी रैंक के अफसर को एडिश्नल कमिश्नर आॅफ पुलिस बनाया जा सकता है। वहीं इसमें राज्य पुलिस सेवा के सीनियर अफसर को डिप्टी कमिश्नर आॅफ पुलिस बनाया जा सकता है। राज्य शासन के पास पूर्व में इस तरह का खाका भेजा जा चुका है। माना जा रहा है कि ज्वाइंट कमिश्नर के दो-दो पद इंदौर और भोपाल शहर में हो सकते हैं। वहीं एडिश्नल पुलिस कमिश्नर के तीन या चार पद हो सकते हैं। इनमें से एक के बाद यातायात और क्राइम ब्रांच का चार्ज हो सकता है। इन पर आईपीएस अफसर ही पदस्थ होंगे। इसके बाद डीसीपी का पद राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के खाते में जाएगा। जिसमें 8 से 10 तक एएसपी रैंक के अफसर डीसीपी बनाए जा सकते हैं।
गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने इसके बाद कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज ने शहरों यह निर्णय लिया है। आईटी और सोशल मीडिया के जरिए बढ़ रहे अपराधों को रोकने में इससे मदद मिलेगी। साथ ही कानून व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के लिए वे गृहमंत्री के नाते सीएम को साधुवाद और धन्यवाद देते हैं।
इंदौर, भोपाल के पहले पुलिस कमिश्नर बनने की दौड़ में कुछ चुनिंदा अफसर शामिल हैं। इस पद पर एडीजी और आईजी रैंक के अफसरों में से पदस्थापना होगी। इनमें एडीजी रैंक के विपिन माहेश्वरी, उपेंद्र जैन, आदर्श कटियार, योगेश चौधरी बन सकते हैं। आईजी में गृह सचिव डी श्रीनिवास वर्मा, राकेश गुप्ता, संतोष कुमार सिंह, हरिनारायणचारी मिश्रा में से किसी अफसर को इंदौर, भोपाल की कमान सौंपी जा सकती है।
दिल्ली और मुंबई के पुलिस कमिश्नर सिस्टम में पुलिस को मजिस्ट्रियल पॉवर के साथ ही लाइसेंस दिए जाने के अधिकार है। ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश में इस सिस्टम को कुछ लचीला बनाया जा सकता है। जिसमें जिला प्रशासन के अफसर के मजिस्ट्रियल पॉवर तो पुलिस को दिए जा सकते हैं, लेकिन शस्त्र लाइसेंस आदि के अधिकारी फिलहाल न दिए जाएं। मजिस्ट्रियल पॉवर मिलने के बाद जिला बदर, एनएसए के साथ ही शहर में धारा 144 लागू करना, धरना-प्रदर्शन की अनुमति देना, लाठीचार्ज के आदेश देने जैसे अधिकार पुलिस के पास आ जाएंगे।
प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लाने की कोशिशें एक दर्जन से अधिक बार हो चुकी हैं, लेकिन हर बार अटक जाती है। बताया जाता है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम का पहला प्रस्ताव तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समय बनाया गया था। तब सिर्फ इंदौर शहर के लिए यह प्रस्ताव था। इसके बाद दिग्विजय सिंह शासन में तीन बार यह प्रस्ताव बनाया गया। एक बार विधानसभा तक पहुंचते-पहुंचते यह प्रस्ताव रह गया। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास भी यह प्रस्ताव पहुंचा। वर्ष 2016 में इसे लागू करने पर गंभीरता से विचार भी हुआ, लेकिन तब इसे लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद कमलनाथ जब मुख्यमंत्री थे तब भी यह प्रस्ताव उनके पास पहुंचा था, उन्होंने भी इसे लागू करने के संकेत दिए थे, लेकिन वे भी इसे लागू नहीं कर सके थे।
