बिना मान्यता के चल रही स्कूल,बच्चो के भविष्य व पालको के साथ हो रहा खिलवाड
जांजगीर चांपा
बिना मान्यता लिये सक्ती विकासखंड के डड़ाई नामक गांव मे बिना शिक्षा विभाग और शासन की अनुमति व मान्यता लिये बिना अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चो को अच्छी शिक्षा देने के पालको से बडी रकम वसूली जा रही है।
सक्ती विकासखंड क्षेत्र के डड़ाई नामक गांव में एक छोटे मकान पर प्रशासन द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन को दरकिनार कर लक्ष्य पब्लिक स्कूल नामक एक निजी प्राइमरी स्कूल का संचालन किया जा रहा है। बिना मान्यता प्राप्त इस स्कूल के बारे मे जानकारी मिली है कि विद्यालय को ना तो सरकारी मान्यता प्राप्त है और ना ही प्रशासनिक मानको के अनुरूप विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। स्कूल संचालक रूपेंद्र दास महंत के द्वारा अपने गुजर-बसर करने वाले बिल्डिंग नुमा मकान पर प्रशासनिक मानको को दरकिनार कर निजी प्राइमरी स्कूल खोलकर विगत लंबे समय से व्यापार किया जा रहा है। स्कूल संचालक के झांसे में आकर भोले-भाले ग्रामीण अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से बिना मान्यता प्राप्त इस लक्ष्य पब्लिक स्कूल देवरी डड़ाई में भर्ती कराकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने लगे है। ऐसे में इन बच्चों को यहां से मिलने वाले अंकसूची की वैधता नहीं होने से उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
बेसिक शिक्षा परिषद का स्फष्ट निर्देश है कि अप्रशिक्षित व गैर स्नातक शिक्षक-शिक्षिकाओं से पठन-पाठन कार्य नहीं कराया जा सकता। विद्यालय संचालन के लिए शासन स्तर से मानक तय है। वही मकान में चल रहे इस निजी विद्यालय की बात करें तो विद्यालय में ना तो प्रशिक्षित शिक्षक मौजूद है और ना हीं छात्र छात्राओं के लिए उत्तम पेयजल, शौचालय और खेल मैदान की पर्याप्त सुविधा है इसके साथ ही साथ स्कूल संचालक के पास स्कूल संचालन एवं मान्यता के संबंध में कोई वैद्य दस्तावेज मौजूद नहीं है। इस प्रकार से आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा है।स्कूल संचालक के हौसले बुलंद
इस गंभीर विषय पर निजी स्कूलों में नोडल अधिकारी भी मॉनिटरिंग नहीं कर रहे हैं। ज्यादातर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में भवन, प्रशिक्षित शिक्षक, पेयजल, शौचालय और खेल मैदान की सुविधा नहीं है। लेकिन फिर भी मनमानी तरीके से विद्यालय को मान्यता बांटकर अनियमितता को बढ़ावा दिया जा रहा है।सूचना मिलने पर भी जांच या कार्रवाई को अफसर टाल रहे हैं जिससे सरकार एवं शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। सब कुछ अफसरों के नाक के नीचे और जानकारी में हो रहा है। ऐसे में शिक्षा अफसरों और स्कूल प्रबंधकों के बीच आपसी मिलीभगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।अपने ऊपर कार्यवाही ना होते देख लक्ष्य पब्लिक स्कूल देवरी डड़ाई संचालक के हौंसले दिन प्रतिदिन बुलंद होते हुए नजर आ रहे हैं जो बिना प्रशासनिक अनुमति एवं बिना मान्यता के विगत लंबे समय से बच्चों की उत्तम पढ़ाई के नाम पर बच्चों के अभिभावकों को झांसा देकर उनसे मोटी फीस वसूल रहे हैं।
न मान्यता का पता, न जवाबदार मौजूद
बिना मान्यता एवं प्रशासनिक अनुमति के बिना संचालित हो रही इस विद्यालय के संचालक से उक्त विषय के संबंध में जब जानकारी ली गई तो स्कूल संचालक रूपेंद्र दास महंत गोलमोल जवाब देते हुए अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागते हुए नजर आए जबकि स्कूल प्रिंसीपल कौन है एवं कहां हैं और कब तक आएंगे इसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी गई।
मान्यता प्राप्त स्कूलों के संरक्षण में चलता है खेल
शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वालों ने कई तरकीबें भी ढूढ़ निकाली है। छात्र बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षा भले प्राप्त करते हैं, लेकिन उनका वास्तविक नामांकन अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में करवाया जाता है। जिससे अभिभावकों को दोहरी फीस का बोझ उठाना पड़ता है। यह अवैध खेल कुछ मान्यता प्राप्त स्कूलों के संरक्षण में खेला जा रहा है। शासन ने मान्यता देने के लिए मानक तय हैं, लेकिन कोई एक कमरे तो कोई दो कमरों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई का बोर्ड लगा कर अपनी दुकान चला रहे हैं। अभिभावकों से नामांकन के नाम पर मोटी रकम लेने के साथ कापी-किताब, यूनीफार्म, जूता आदि सामान के नाम पर धन उगाही कर रहे हैं। सब कुछ जानते हुए भी विभागीय अधिकारी अंजान बने हुए है।
इन्होने कही ये बाते
यह स्कूल नहीं है यहां बच्चों को ट्यूशन दिया जा रहा है।रूपेंद्र दास महंत संचालक लक्ष्य पब्लिक स्कूल देवरी डड़ाई
इस प्रकार का मामला है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
श्रीमती मीता मुखर्जी, जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती
