453 दिनों से गायब कर्मचारी बोला-नियमों से था अनजान, दो वेतनवृद्धि रोकी

भोपाल
मंत्रालय में पदस्थ एक सहायक ग्रेड तीन कर्मचारी 453 दिन से बिना बताए  गायब था। जब सरकार ने जांच के बाद नौकरी से हटाने नोटिस थमाया तो उसने दी सफाई कि वाहन दुर्घटना में घायल भाई का इलाज कराने चला गया था और नियमों का ज्ञान न होंने के कारण उनसे यह त्रुटि हुई है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने कर्मचारी की दो वेतन वृद्धि रोकते हुए उसके काम पर वापस ले लिया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक मंत्रालय में पदस्थ सहायक ग्रेड तीन अमित मर्सकोले 11 फरवरी 2019 से 28 फरवरी 2019 के लिए साधारण अवकाश का  आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष एक में प्रस्तुत कर अवकाश स्वीकृत कराए बिना अवकाश पर चले गए।

नौ माह बीत जाने के बाद भी वे अपने काम पर उपस्थित नहीं हुए। लंबे समय से अनाधिकृत रूप से गायब रहने पर उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। जिसके जवाब में 6 मई 2020को उन्होंने जवाब पेश किया और पारिवारिक परेशानियों के चलते अनुपस्थित रहने का कारण बताया। उनके इस उत्तर को उचित नहीं पाए जाने पर उनकी विभागीय जांच शुरु की गई। उपसचिव जीएडी मनीष सेतिया और अवर सचिव रंजना पाटले ने इसकी जांच की । जांच के बाद जांच अधिकारियों ने 30 दिसंबर 2020 को अपने जांच प्रतिवेदन में कहा कि अमित ने अपने कथन में स्वीकार किया है कि उनपर लगाया गया आरोप सही है। आरोपा प्रमाणित पाए जाने पर अमित को बचाव का एक और मौका देते हुए उनसे जवाब मांगा गया।

अमित ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बड़े भाई दुर्घटना में घायल हो गए थे। इस कारण उनका गृह निवास जाना जरूरी था। घर में वृद्धा माता-पिता है और अन्य समस्याएं थी इस कारण वे घर चले गए थे। उनके पास आवकाश की पात्रता नहीं होने के कारण  18 दिन के साधारण अवकाश आवेदन देकर वे चले गए थे। जानबूझकर या अनािधकृत रूप से वे अवकाश पर नहीं गए थे। उन्हें दिए गए आरोप पत्र में आरोप स्वीकार करने पर सेवा समाप्ति का निर्णय ले लिया गया।

 जबकि उनके पारिवारिक समस्याओं पर विचार नहीं किया गया। अमित ने बताया कि उन्हें नियमों का ज्ञान नहीं होने के कारण त्रुटि हुई और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार ने इस सफाई पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर अमित मर्सकोले की दो वेतन वृद्धि रोकते हुए उनके गैर हाजिरी अवधि को बिना सेवा विराम के अकार्य दिवस किए जाने की सजा देते हुए प्रकरण समाप्त कर दिया है।

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