आंदोलन मंच के पास हुई शख्स की हत्या में निहंग ने किया सरेंडर, कोर्ट में आज होगी पेशी

   नई दिल्ली

सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के लिए बने मंच के पास हुई दलित शख्स की हत्या के मामले में एक निहंग ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. निहंग सरवजीत सिंह ने दावा किया कि उसने ही हत्या की थी. पुलिस निहंग को आज कोर्ट में पेश करेगी, जिससे पहले उसका मेडिकल करवाया जाएगा.

मंच के पास से दलित शख्स लखबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी, जिसके शव से हाथ को अलग करके बैरिकेड पर लटका दिया गया था. सुबह मामले के सामने आने के बाद देशभर में हड़कंप मच गया. लखबीर सिंह पंजाब के तरन-तारन जिले के चीमा खुर्द गांव का रहने वाला था. लखबीर की उम्र 35-36 साल बताई जा रही है. उसके माता-पिता की पहले ही मौत  हो चुकी है, जबकि उसकी तीन बेटियां भी हैं, जोकि अपनी मां के साथ रहती हैं.

निहंग सरवजीत सिंह ने शुक्रवार शाम को पुलिस के सामने सरेंडर किया. उसने जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि उसने ही लखबीर सिंह की हत्या की. अब पुलिस वीडियो के जरिए से सरवजीत सिंह की पहचान करेगी. घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें लखबीर को बैरिकेड से लटकाया हुआ दिखाया गया था.

निर्वेर खालसा-उड़ना दल ने ली घटना की जिम्मेदारी

घटना की जिम्मेदारी निहंग समूह निर्वेर खालसा-उड़ना दल ने ली है. निहंग समूह ने एक वीडियो में कैमरे के सामने स्वीकार किया है कि उनके समूह के ही निहंग ने लखबीर की हत्या की. समूह के पंथ-अकाली बलविंदर सिंह ने वीडियो में बताया कि घटना देर रात तीन बजे की है. उसने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की थी, जिसके बाद उसे मारा गया. बलविंदर ने वीडियो में बताया कि यदि कोई और शख्स भी बेअदबी करेगा तो उसके साथ भी ऐसा ही सुलूक किया जाएगा.

संयुक्त किसान मोर्चा ने पल्ला झाड़ा

उधर, घटना के बाद से कई महीने से धरने पर बैठे किसान नेताओं पर सवाल खड़े होने लगे हैं. हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने हत्या से पल्ला झाड़ लिया है और कहा है कि मृतक और निहंग, दोनों से ही उनका कोई संबंध नहीं है. इस सिलसिले में एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा गया है कि उन्होंने कई बार दिल्ली और हरियाणा की पुलिस को निहंग सिखों को लेकर अलर्ट किया था. यह भी बता दिया गया था कि निहंग उनके मोर्चे का हिस्सा नहीं हैं.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी घटना पर दुख जताया है. उन्होंने कहा है कि जो भी सच होगा, वह पुलिस की जांच में सामने आ जाएगा. किसान आंदोलन का हत्या से लेना-देना नहीं है.

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