बिजली का संकट से इंकार, हमारे पास 24 दिनों का स्टॉक’: केन्द्रीय मंत्री

नई दिल्ली

 देश में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, दिल्ली और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में कोयले की कमी और उसकी वजह से बिजली का संकट पैदा होने का खतरा बढ़ रहा है। लेकिन केन्द्र सरकार इससे साफ इंकार कर रही है। कोयले के संकट पर केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बयान देते हुए कहा कि पॉवर सप्लाई में बाधा आने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि कोल इंडिया के पास इस वक्त 430 लाख टन कोयले का स्टॉक है, जिससे 24 दिनों तक देश भर में कोयले की डिमांड पूरी की जा सकती है।

 

उधर, तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा कोयले की कमी का मुद्दे उठाने के बाद केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के.सिंह ने दिल्ली में डिस्कॉम के सभी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। बाद में उन्होंने बताया कि सभी पावर स्टेशन के पास 4 दिन से ज्यादा का कोयले का स्टॉक है। इसके अलावा रोजाना जितना खर्च होता है, उतने स्टॉक की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिल्ली में जितनी बिजली की आवश्यकता है, उतनी बिजली की आपूर्ति हो रही है और होती रहेगी।

कैसे पैदा हुआ ये संकट?

    केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर.के.सिंह के मुताबिक ये माहौल इसलिए बना क्योंकि गेल ने दिल्ली के डिस्कॉम को एक मैसेज भेज दिया कि वो बवाना के गैस स्टेशन को गैस सप्लाई एक या दो दिन बाद बंद करेगा। वो मैसेज इसलिए भेजा क्योंकि उसका कांट्रैक्ट समाप्त हो रहा है।

    मंत्री ने बताया कि बैठक में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) के सीएमडी भी आए हुए थे। हमने उन्हें कहा है कि कांट्रैक्ट रहे या ना रहे, जितनी गैस की जरूरत है, उतनी गैस आप देते रहेंगे।

    ये सही है कि अभी पहले की ​तरह कोयले का 17 दिन का स्टॉक नहीं है, बल्कि सिर्फ 4 दिन का स्टॉक है। कोयले की ये स्थिति इसलिए है क्योंकि मांग बढ़ी है और कोयले के आयात में कमी की गई है। सरकार कोयले की अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    मानसून की वजह से कोयले की ढुलाई पर असर पड़ा है। अब बारिश खत्म हो गई है, इसलिए इसके उत्पादन और ढुलाई में तेजी आएगी।

    डिस्कॉम के अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में बिजली की मांग बढ़ रही है और अब यह 2020 से भी अधिक हो गई है।

    इस साल जुलाई और सितंबर के बीच, दिल्ली में बिजली की मांग 2020 के इसी अवधि की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक और 2019 की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है।

    आर्थिक गतिविधियों के फिर से शुरू होने और मौसम की वजह से भी शहर की बिजली की मांग बढ़ी है।

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