कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस उपचुनाव में उलझ गई, एजेंडा जारी लेकिन तारीख तय नहीं

भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जिलों में होने वाले काम की समीक्षा के लिए की जाने वाली कलेक्टर-कमिश्नर, आईजी-एसपी कांफ्रेंस उपचुनाव में उलझ गई है। राज्य सरकार ने इसके लिए एजेंडा तो जारी कर दिया है लेकिन इसकी तारीख तय नहीं हो पा रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह कांफ्रेंस माह के अंतिम सप्ताह में हो सकती है। सीएम सचिवालय भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सका है।

पांच माह के अंतराल के बाद मुख्यमंत्री चौहान ने पिछले माह 23 सितम्बर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कलेक्टर, एसपी, आईजी-कमिश्नर कांफ्रेंस की थी। इस कांफ्रेंस में जन कल्याण और सुराज अभियान समेत सरकार की अन्य प्राथमिकताओं पर अमल के लिए कलेक्टर, एसपी को निर्देश दिए गए थे। साथ ही त्यौहारों के मद्देनजर सौहार्द्रपूर्ण वातावरण के लिए भी निर्देश दिए गए थे। अब इस माह होने वाली कांफ्रेंस को लेकर सरकार असमंजस में है क्योंकि चार उपचुनाव के चलते 8 जिलों के कलेक्टर, एसपी चुनावी प्रक्रिया से जुड़े हैं।

नामांकन दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 30 अक्टूबर को चुनाव के लिए वोटिंग है और दो नवम्बर को मतगणना होना है। इसलिए यहां के अधिकारी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। ऐसे में कांफ्रेंस में सभी कलेक्टर, एसपी नहीं जुड़ सकेंगे। सूत्रों का कहना है कि इसी कारण अब तक बैठक की तारीख तय नहीं हो सकी है। हालांकि बैठक का एजेंडा जारी कर दिया गया है। अभी तक कलेक्टरों को जो सूचना दी गई है, उसके मुताबिक बैठक चुनाव प्रचार थमने के बाद हो सकती है या फिर अगले माह के लिए टाली जा सकती है।

अभी जो एजेंडा बैठक के लिए जारी हुआ है उसमें शहरी क्षेत्रों में कोरोना काल में रोजगार देने के लिए शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा शामिल है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ग्रामीण पथ विक्रेता योजना की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा कानून व्यवस्था पर भी सरकार फोकस कर रही है।  

जिलों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कसावट लाने और हितग्राहियों को लाभ दिलाने के लिए सीएम चौहान वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान बिन्दुवार समीक्षा करते हैं। वे अफसरों की कार्यशैली पर तंज भी कर चुके हैं कि वल्लभ भवन में बैठकर मीटिंग करने पर उन्हें प्रदेश में आनंद ही आनंद बताया जाता है लेकिन जब जिलों में जाते हैं और जनता के साथ संवाद करते हैं तो असली स्थिति सामने आती है। कांफ्रेंस में ऐसे हालातों पर नियंत्रण के लिए कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे।

 

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