आतंंकी घाटी में फिर डर फैला रहे , अब तक 28! निहत्थे हैं निशाना
श्रीनगर
श्रीनगर के ईदगाह इलाके में एक सरकारी स्कूल के अंदर घुसकर प्रिंसिपल और शिक्षक को गोली मारकर कत्ल कर दिया। पांच दिनों में घाटी में आतंकियों ने सात नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद से यह स्पष्ट है कि आतंकी अपनी रणनीति में अब बदलाव कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस साल अब तक आतंकियों ने कश्मीर में 28 नागरिकों की हत्या की है। कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल विजय कुमार ने एक बयान जारी कर बताया कि इन 28 में से पांच स्थानीय हिंदू/सिख समुदाय के लोग थे और वहीं 2 गैर-हिंदू मजदूर।
कुमार ने यह भी बताया कि आतंकवादियों पर सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई का बदला लेने के लिए नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। बीते सालों में सुरक्षाबलों ने आतंकवादी संगठनों के सरगनाओं, घाटी में मौजूद उनके ठिकानों को तबाह करने के काम किया और यहां कानून-व्यस्था स्थापित होनी शुरू हुई है, जो कि आतंकियों को नागवार गुजर रहा है। उन्होंने यह कहा कि आतंकी गुटों ने अब अपनी रणनीति में बदलाव किया है और वे निहत्थे पुलिसवालों, नागरिकों, राजनेताओं और महिलाओं सहित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।
कुमार ने कहा, 'इन सभी हत्याओं के लिए आतंकवादियों ने पिस्टल का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, ये सारे हमले संगठनों में भर्ती किए गए नए आतंकियों ने किए हैं या फिर उन्होंने जो बस आतंकी का टैग पाने वाले हों। पुलिस इन आतंकियों की पहचान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।'
आईजी ने यह भी कहा कि पुलिस को कई सबूत मिले हैं और उनपर काम किया जा रहा है। बता दें कि ईदगाह इलाके के गवर्नमेंट ब्वॉयज सेकेंडरी स्कूल, प्रधानाध्यापक सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की गुरुवार सुबह करीब सवा 11 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय स्कूल में कोई विद्यार्थी नहीं था। इस घटना की खबर फैलते ही शहर और घाटी के कुछ हिस्सों में एक तरह का भय व्याप्त हो जाने के बीच जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि कश्मीर में नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्या का मकसद भय का माहौल बनाना और सदियों पुराने सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाना है।
