लखीमपुर पर न्याय मांगने शाह से मिलने पहुंचे चन्नी
नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर-खिरी में हुए बवाल के बाद इस मामले पर सियासत जारी है। अब पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। लखीमपुर की घटना में वो न्याय मांगने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। मंगलवार को दिल्ली के लिए निकलने से पहले चरणजीत सिंह चन्नी ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'यह तीनों कृषि कानून जल्द से जल्द वापस लिये जाने चाहिए। लखीमपुर खिरी में जिस तरह की घटना हुई है उसे रोका जाना चाहिए। मैं इस विषय पर आज केंद्रीय गृहमंत्री से बातचीत करुंगा।' रविवार को लखीमपुर-खिरी में हुए हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। संयुक्त किसान मोर्चा और कई अन्य किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि इस घटना में 4 किसानों की मौत हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्रीी अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा टेनी तीन गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे। उसी वक्त किसान से वहां निकल रहे थे तब ही उनके काफिले में शामिल गाड़ियों ने इंसानों पर गाड़ी चढ़ा दी। इसमें 4 किसानों की मौत हो गई।
चन्नी ने कहा कि लखीमपुर खीरी में हुयी हिंसा ने उन्हें 1919 की जलियांवाला बाग घटना की याद दिला दी । इससे पहले चन्नी ने राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों के साथ यहां गांधी स्मारक भवन परिसर में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुयी हिंसा के विरोध में सोमवार को मूक प्रदर्शन किया। केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल किसानों के शुरू हुये विरोध प्रदर्शन के बाद से रविवार को सबसे खूनी संघर्ष हुआ। जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। मरने वालों में चार किसान थे, जिन्हें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत के लिए एक कार्यक्रम में जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से वाहनों से कुचल दिया था। अन्य लोग भाजपा के कार्यकर्ता और उनके चालक थे, जिन्हें वाहन से खींच कर बाहर निकाला गया और पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी गयी । इसके अलावा दो कारों को आग के हवाले कर दिया गया।
चन्नी ने आरोप लगाया कि किसानों की ''हत्या'' जानबूझ कर की गयी है । उन्होने कहा कि वह शाम साढे़ छह बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे और उनके समक्ष लखीमपुर खीरी की घटना को उठायेंगे। केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर बरसते हुये चन्नी ने कहा कि उन्हें देश के युवाओं को देश में दोबारा लोकतंत्र 'बहाल' करने के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और शहीद उधम सिंह जैसे शहीदों की ओर देखने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। चन्नी ने कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना ''दुखद'' है और तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को तत्काल प्रभाव से वापस लिये जाने की मांग की। पंजाब के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ''शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर जिस तरीके से एसयूवी कार को पीछे से चढाया गया और उनकी हत्या की गयी, वह जानबूझ कर किया गया था ।''
इधर इस मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने भी अल्टीमेटम दिया है। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कहा कि अगर प्रियंका गांधी को रिहा नहीं किया गया और हत्या के आरोपी केंद्रीय मंत्री के बेटे को गिरफ्तार नहीं किया गया तो पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की ओर मार्च करेंगे। सिद्धू ने ट्वीट करते हुए लिखा है, किसानों की हत्या के पीछे जिस केंद्रीय मंत्री के बेटे का हाथ है, उसे बुधवार तक गिरफ्तार नहीं किया गया और किसानों के हक में लड़ रहीं गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार की गईं हमारी नेता प्रियंका गांधी को रिहा नहीं किया गया तो पंजाब कांग्रेस लखीमपुर खीरी तक मार्च करेगी। एक अन्य ट्वीट में, सिद्धू ने सत्य के मार्ग पर चलने की सलाह देते हुए अपने नैतिक मूल्यों से कभी समझौता नहीं करने का आह्रान भी किया। उन्होंने प्रियंका को नैतिकता की मिसाल बताया। उन्होंने इसके लिये उस वीडियो क्लिप का जिक्र किया जिसमें इस तरह की घटना दिख रही है।
