जाने Lentils खाने का सही तरीका

युर्वेदिक डॉ. दीक्षा भावसार आए दिन ही हमें सेहत से जुड़ी कोई न कोई जानकारी देती रहती हैं। खास बात ये है कि जब भी वे किसी समस्या को लेकर कोई नुस्खा साझा करती हैं तो आजमाने पर उसके साइड इफेक्ट्स न होने की भी गारंटी देती हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने हमारे बेहतर स्वस्थ्य के लिए एक टिप शेयर की है, जो कि हमारे खान-पान से संबंधित है। अपने लेटेस्ट इंस्टाग्राम पोस्ट में डॉ. दीक्षा ने दालों को भिगोकर बनाने के पीछे के फायदों के बारे में बताया है। तो आइए जानते हैं कि पकाने से पहले दालों को भिगोना क्यों जरूरी है?

​डॉ. की सलाह, भिगोकर दाल खाना है फायदेमंद

डॉक्टर दीक्षा लिखती हैं, “मैं खाना पकाने से पहले अपनी दालों को भिगोना सुनिश्चित करती हूं। मैं मूंग की दाल का ज्यादातर सेवन करती हूं, क्योंकि ये पकाने में नहीं बल्कि सभी दालों की अपेक्षा पचाने में भी बहुत आसान होती है। यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो दालों को अपने आहार में लेना पसंद करते हैं और उनके सेवन के बिना एक दिन भी नहीं रह सकते हैं तो मेरे पास आपके लिए एक टिप है, वो ये कि कुकर में सीटी लगाने से पहले दालों को रोजाना भिगोएं। आप जानते हो ऐसा करने के लिए मैं क्यों कह रही हूं?'
क्यों जरूरी दाल को भिगोकर खाना?

​भिगोकर दालों को पकाने से बढ़िया रहता है डाइजेशन

डॉ. अपने पोस्ट में बताती हैं कि 'दालों को अच्छी तरह से पानी में भिगोकर पकाने से हमारी हेल्थ को अच्छे परिणाम मिलते हैं। इस तरह दाल खाने से हमारा पाचन (digestion) और पोषण अवशोषण (nutrition absorption) बेहतर होता है। यही मुख्य कारण है कि मैं आपको पकाने से पहले भिगोने को कह रही हूं। अगर आप दालों में मौजूद सभी पोषक तत्वों का अच्छे से लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें भिगोकर पकाएं।'

​भिगोने से दालों से हट जाता है फाइटिक एसिड और टैनिन

डॉक्टर का कहना है कि 'भिगोने से दालों में ताजगी आ जाती है। हालांकि, उन्होंने पोस्ट में प्राण (Life) का प्रयोग किया है। साथ ही इस टिप से फलियों से फाइटिक एसिड और टैनिन भी हट जाता है, जो कि पोषण के अवशोषण (absorption of nutrition) को रोकता है और ब्लोटिंग का कारण बनता है। यही वजह है कि राजमा जैसी हैवी फलियां खाने के बाद ज्यादातर लोग फूला हुआ महसूस करते हैं और उन्हें गैस्ट्रिक परेशानी होती है। खास बात ये भी है कि भिगोने के बाद आप अपना कुकिंग का टाइम भी बचाते हैं, क्योंकि फूली हुई फलियां जल्दी उबल जाती हैं। यही दालों का पकाने का सही तरीका है।' वह कहती हैं कि झटपट खाने से बेहतर है कि उसे तरीके से पकाएं और लुत्फ उठाएं।

​भिगोने का समय

    साबुत दाल जैसे मूंग, तुवर, मसूर, उड़द की दाल बनाने से पहले 8 से 12 घंटे तक भिगोनी चाहिए।
    कोई भी स्प्लिट दाल को 6 से 8 घंटे भिगोना चाहिए।
    भारी फलियां जैसे- राजमा, चना और छोले को 12 से 18 घंटे तक भिगोना चाहिए।
    किसी भी दाल को रातभर भिगोना सबसे अच्छा विकल्प है।
    दालों के भोजन का आनंद लेने का सबसे अच्छा समय लंच टाइम है।

​दालों के भीगे हुए पानी का कैसे करें प्रयोग?

डॉक्टर ने अपनी पोस्ट में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न का भी जवाब दिया है। डॉक्टर से लोग पूछते हैं कि, 'हम दालों के भीगे हुए पानी का क्या करते हैं? क्या हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं हैं या इसे फेंक दें?'

डॉक्टर ने जवाब दिया, 'चूंकि इसमें टैनिन और फाइटिक एसिड होता है- हम इसका उपयोग नहीं करना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा तरीका है कि आप इसका उपयोग अपने पौधों को पानी देने में करें। इस तरह आपके घर के पौधों को भी कुछ पोषण मिलेगा।

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