झारखंड में मिली हार की टीस नहीं भुला पा रही बीजेपी, चुनावी राज्यों में इसलिए बदले जा रहे मुख्यमंत्री
नई दिल्ली
बीजेपी नेता विजय रुपाणी ने शनिवार को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वह भी तब जब राज्य में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। बीते 2 महीने में वह बीजेपी के तीसरे ऐसे नेता हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि पार्टी को झारखंड में मिलने वाली हार के बाद अब बीजेपी किसी भी राज्य में जोखिम नहीं उठाना चाहती है और इस कारण उन मुख्यमंत्रियों की विदाई हो रही है जो अपेक्षाओं के मुताबिक प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं।
दरअसल, बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में दमदार वापसी की लेकिन इसके छह महीने बाद ही झारखंड में पार्टी को हार का स्वाद चखना पड़ा। बीजेपी को राज्य में हेमंत सोरेन की अगुवाई में हुए गठबंधन से हार मिली। इस तरह के चुनाव परिणाम की पार्टी के ही अंदर कई लोगों ने भविष्यवाणी भी की थी। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास की अलोकप्रियता को कारण बताया जाता था।
अब माना जा रहा है कि झारखंड में मिली इस हार से सबक लेते हुए बीजेपी ने इस साल पांच मुख्यमंत्री बदल दिए हैं, जिनमें से ताजा नाम विजय रुपाणी का है। शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि नुकसान से पहले ही नुकसान को नियंत्रित कर लिया जाए।
हरियाणा में साल 2019 में चुनाव हुए थे और तब बीजेपी बहुमत पाने में असफल रही। पार्टी को गठबंधन सरकार बनानी पड़ी। हालांकि, बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर को ही सीएम बनाए रखा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि झारखंड की हार और हरियाणा में खराब प्रदर्शन के बाद बीजेपी ने अब फैसला लिया है कि जो सीएम कम चर्चित या ओलकप्रिय हैं, जिनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, उन्हें अगले चुनाव से पहले पद छोड़ना पड़ेगा।
बीजेपी ने इसकी शुरुआत इसी साल उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से की थी। हालांकि, उनके बाद पार्टी ने तीरथ सिंह रावत को सीएम बनाया और उन्हें भी तकनीकी कारणों से पद छोड़ना पड़ा। अब पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के सीएम हैं। असम चुनाव में भी पार्टी ने सर्बानंद सोनोवाल की बजाय प्रचलित चेहरा माने जाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी। इसके बाद बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए पार्टी ने कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की जगह भी बसवाराज बोमई को सीएम पद सौंपा। इससे यह भी संदेश गया कि पार्टी अब येदियुरप्पा के बिना 2023 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। रुपाणी की विदाई इस बात का साफ संकेत देती है कि बीजेपी किसी भी कीमत पर झारखंड की तरह गुजरात विधानसभा चुनाव में हारना नहीं चाहती है।
