प्रदेश पुलिस महकमा में आईजी की कमी, बीस दिन बाद 15 पुलिस महानिरीक्षक ही बचेंगे

भोपाल
प्रदेश पुलिस महकमा डीआईजी की कमी से लंबे अरसे बाद उभरा था, लेकिन अब आईजी की कमी सामने आ चुकी है। यह कमी प्रदेश पुलिस में इस पोस्ट की अब तक की सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है। बीस दिन बाद प्रदेश पुलिस में महज 15 पुलिस महानिरीक्षक ही बचेंगे। प्रदेश में वर्ष 1997 से 2003 बैच तक के अफसर आईजी हैं। यह वह दौर था जब तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान प्रदेश पुलिस ने डायरेक्ट आईपीएस अफसर कम संख्या में लिए थे। उस वक्त की यह संख्या अब असर दिखा रही है। उस समय पर्याप्त मात्रा में आईपीएस अफसरों की डिमांड नहीं करने के कारण अब प्रदेश में आईजी रैंक के अफसरों की भारी कमी हो गई है। फिलहाल प्रदेश में 17 आईजी है। इनमें से दो आईजी 30 सितम्बर को रिटायर हो रहे हैं। इनके रिटायर होने के बाद आईजी की संख्या 15 हो जाएगी।

वर्ष 1997 में चार आईपीएस प्रदेश को मिले थे। इनमें मकरंद देउस्कर, डी श्रीनिवास वर्मा, उमेश जोगा और सोलोमन यश के मिंज शामिल हैं। इनमें से मिंज प्रतिनियुक्ति पर हैं। जबकि वर्ष 1998 में तीन आईपीएस अफसर प्रदेश को मिले थे, इनमें विवेक शर्मा, अंशुमान यादव और साजिद फरीद साबू शामिल हैं। वहीं वर्ष 1999 में प्रदेश को राकेश गुप्ता और दीपिका सूरी बतौर आईपीएस अफसर मिले। वर्ष 2000 में सिर्फ संतोष कुमार सिंह  प्रदेश को बतौर आईपीएस अफसर मिले। इसके बाद वर्ष 2001 और 2002 में प्रदेश को एक भी आईपीएस अफसर नहीं मिल सका। वर्ष 2003 में भी महज दो आईपीएस अफसर प्रदेश को मिले। इनके अलावा सात आईजी और प्रदेश में हैं। ये राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईजी बने हैं।

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