श्रीलंका में खाने को मोहताज हुए लोग, राजपक्षे सरकार का देश में भोजन की कमी से इनकार

 नई दिल्ली  
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे ने 30 अगस्त 2021 को देश के सावर्जनिक सुरक्षा अध्यादेश में निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जरूरी खाद्य पदार्थों के वितरण के संबंध में आपातकालीन नियम लगा दिए हैं। इसके बाद सरकार ने गारंटी कीमतों पर धान, चावल और चीनी सहित जरूरी खाद्य पदार्थों का स्टॉक खरीदा है। सरकार का कहना है कि बाजार की अनियमितताओं और जमाखोरी पर रोक लगाकर जनता को रियायती दर पर जरूरी खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।

श्रीलंकाई सरकार ने देश में भोजन की कमी से इनकार किया है। लेकिन आम लोग केरोसीन तेल से लेकर चावल तक को लेकर तरस रहे हैं। श्रीलंका बड़े आर्थिक संकट की ओर जाता दिख रहा है। राष्ट्रपति राजपक्षे ने सेना के एक टॉप अधिकारी को धान, चावल, चीनी सहित अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति के समन्वय के लिए नियुक्त किया है।

पिछले कुछ महीनों से श्रीलंका की करेंसी गिरती जा रही है। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 200 श्रीलंकाई रुपये तक पहुंच गई है। इसे देखते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ़ श्रीलंका ने हाल ही में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। देश में आलू, प्याज, चीनी और चावल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दिख रही है। इसके लिए सरकार जमाखोरों को जिम्मेदार बता रही है। इसके साथ ही श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट जारी है। जुलाई आख़िर तक यह गिरकर 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया था। 2019 में गोताबाया के सत्ता संभालने के वक्त यह 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर था।  
 
कोरोना वायरस ने श्रीलंका को तोड़कर रख दिया है। पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट है। कई महीने तो ऐसे रहे जब हजार लोग भी श्रीलंका नहीं पहुंचे हैं। बता दें कि श्रीलंका की इकॉनमी में पर्यटन का बहुत बड़ा रोल है और यही कारण है कि श्रीलंका की इकॉनमी में पिछले साल रिकॉर्ड 3.8 फीसद की गिरावट आई है। चाय के उत्पादकों ने भी सरकार को उत्पादन में 50 फीसद गिरावट की चेतावनी दी है।

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