शिक्षा विभाग के हेडमास्टर से वसूली आदेश को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

बिलासपुर
छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गये हेडमास्टर से वसूली आदेश को निरस्त करते हुए दो माह के भीतर समस्त देयकों का भुगतान करने करने के निर्देश विभाग को दिये है। दुर्ग के सेवानिवृत्त प्रधानपाठक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने दो लाख 90 हजार र्स्पये का वसूली आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही उनके पेंशन सहित अन्य देयकों की राशि रोक दी थी। जिसके खिलाफ प्रधानपाठक ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय मे याचिका दायर की थी।जिस पर सुनवाई होने बाद न्यायालय ने यह आदेश दिया।

दुर्ग निवासी कृष्णकुमार देवांगन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया है कि शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। लंबी सेवा अवधि के बाद 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें नवंबर 2020 में प्रधानपाठक के पद से सेवानिवृत्ति दी गई। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण करने के कारण विभाग ने 21 फरवरी 2021 को उनके खिलाफ दो 92 हजार र्स्पये वसूली आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही उनके पेंशन सहित अन्य देयकों का भुगतान भी रोक दिया गया।

याचिका में बताया गया कि विभागीय त्रुटि का खामियाजा याचिकाकर्ता को रिटायरमेंट के बाद भुगतना पड़ रहा है। शासन व पेंशन महालेखाकार द्वारा जारी दिशानिदेर्शों के मुताबिक किसी भी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के पहले उनके समस्त देयकों के विवाद का निराकरण कर दिया जाना चाहिए। त्रुटिपूर्ण वेतन का निर्धारण का आरोप गलत है। यदि मान लिया जाए वेतन का निर्धारण त्रुटिपूर्ण किया गया है। फिर भी इसके लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं है। याचिकाकर्ता के खिलाफ रिकवरी आदेश जारी करने के पहले उन्हें सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। लेकिन विभाग ने एकपक्षीय आदेश जारी कर न्याय के सिद्धांतों के विपरीत कार्य किया है।

इस स्थिति में याचिकाकर्ता का पेंशन व अन्य देयक का भुगतान रोकना सही नहीं है। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही शासन को दो माह के भीतर उनके समस्त देयकों का भुगतान करने का आदेश दिये है।

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