भारत की टेंशन बढ़ा रहा तालिबान, चीन-पाकिस्तान के साथ CPEC प्रोजेक्ट में होना चाहता है शामिल

 काबुल 
अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से ही चीन और तालिबान एक दूसरे पर डोरे डाल रहे हैं और अब तालिबान ने अपने आका यानी पाकिस्तान की राह पर चलते हुए चीन के महत्वाकांक्षी CPEC यानी चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़ने की इच्छा जाहिर की है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोमवार को यह कहा कि उनका संगठन CPEC में शामिल होने की इच्छा रखता है। तालिबान के इस बयान से भारत की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि भारत इस परियोजना का हमेशा से मुखर विरोधी रहा है। मुजाहिद ने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ फैज हामिद और तालिबान के सीनियर नेता मुल्लाह अब्दुल गनी बरादर की मुलाकात होने वाली है।

CPEC चीन के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव' यानी BRI का हिस्सा है। चीन बीआरआई को ऐतिहासिक सिल्क रूट का मॉडर्न अवतार बताता है। दरअसल, मध्य युद में सिल्क रूट वह रास्ता था जो चीन को यूरोप और एशिया के बाकी देशों से जोड़ता था। वहीं, चीन-पाक आर्थिक गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अक्साई चीन जैसे विवादित इलाकों से होकर गुजरता है। 

यह एक हाइवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जो चीन के काशगर प्रांत को पाकिस्तान के ग्वारदर पोर्ट से जोड़ेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान में बंदरगाह, हाइवे, मोटरवे, रेलवे, एयरपोर्ट और पावर प्लांट्स के साथ दूसरे इंफ्रस्क्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को डेवलप किया जाएगा। विवादित क्षेत्र से गुजरने की वजह से ही भारत इसका विरोध करता है। 

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