CPA के अभी तक नहीं बनी देनदारियों की रिपोर्ट, पार्क और सड़कों का मसला भी उलझा
भोपाल
क्या राजधानी परियोजना वाकई बंद होजाएगी। अगर खराब सड़कों को लेकर कार्यवाही की जानी थी तो उसके निशाने पर सबसे पहले पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को होना चाहिए था जिनके पास ज्यादा सड़कों की जिम्मेदारी है और सबसे ज्यादा उनकी ही सड़के खराब हैं, लेकिन इस बार हुआ उल्टा। जिन विभागों के खिलाफ सख्ती होनी थी उनको दरकिनार कर सीपीए को निशाना बनाया गया है। अब जब सीएम ने इसको बंद करने के निर्देश दिये तो उसकी जिम्मेदारी लेने के लिये कोई भी विभाग तैयार नहीं है। दूसरी तरफ सीपीए के बड़े अधिकारी अभी तक अपना हिसाब किताब तैयार नहीं बना पाये हैं ताकि सरेंडर करते समय सब कुछ क्लियर हो।
राजधानी परियोजना प्रशासन के पार्क अब नगर निगम संवारेगा पर कैसे यह क्लियर नहीं हुआ है क्योंकि उसके खुद के पार्क बदहाल पड़े हैं। सीपीए के 132 एकड़ में मयूर, एकांत, ऋषभदेव जैसे 7 बड़े पार्क है। जिन्हें नगर निगम को सौंपने की बात नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह कह चुके हैं। वर्तमान में नगर निगम के 157 पार्क हैं। ऐसे में सीपीए के पार्कों की देखरेख करने में नगर निगम को ज्यादा परेशानी नहीं आएगी, क्योंकि अमला भी पर्याप्त है। हालांकि, नगर निगम की तुलना में सीपीए के पार्क काफी बेहतर है।
सीपीए की मास्टर प्लान सड़कों के निर्माण से लेकर सीपीए की मौजूदा 100 किमी सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को देने की बात कही जा रही है लेकिन इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के मंत्री गोपाल भार्गवकी प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। जब तक उनकी तरफ से बात क्लियर नहीं होगी। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि निगम ही सड़कों को तरह तरह के बहानों पर खोदता है। उसको ही इनकी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। सवाल सड़कों को लेने का नहीं बल्कि उनके बजट का है। इसके अलावा सीपीए को सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को लाखों रूपये का पुराना भुगतान करना है। अब इसको कहां से किया जाएगा यह भी देखा जा रहा है।
