दारुल उलूम ने किया मौलाना अरशद मदनी के बयान का समर्थन

सहारनपुर देवबंद
जमीयत उलेमा ए हिंद राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के लड़का-लड़की के लिए अलग-अलग स्कूल के बयान का दारुल उलूम के मोहतमिम ने समर्थन किया है। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि को-एजुकेशन को लेकर जमीयत अध्यक्ष ने जो बयान दिया है, वह उसका समर्थन करते हैं। बता दें कि वर्ष 2007 में दारुल उलूम के फतवा विभाग ने को-एजुकेशन को लेकर फतवा जारी किया था। जो उस समय में भी चर्चा का विषय बना था। 14 साल बीत जाने के बाद भी दारुल उलूम अपने फतवे पर कायम है। वहीं अन्य शिक्षाविदों ने अपनी अलग-अलग राय दी है। उनका कहना है कि लड़का और लड़कियों के एक साथ पढ़ने में किसी तरह की बुराई नहीं है। करीब-करीब सभी देशों में लड़के और लड़कियां एक की स्कूल और कालेज में पढ़ाई करते हैं। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज का कहना है कि लड़के और लड़कियों को एक फ्रेंडली माहौल मिलना चाहिए। जेवी जैन कालेज के इकोनोमिक्स डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. खालिद अनवर का कहना है कि लड़के और लड़कियों को एक साथ पढ़ने में कोई बुराई नहीं है। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में लड़के-लड़कियां दोनों पढ़ रहे हैं, वहां कोई दिक्कत नहीं है। समय के अनुसार हर स्कूल-कॉलेज में को-एजुकेशन होना चाहिए। ताकि बेटियों को न लगे कि उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।

को-एजुकेशन बहुत जरूरी: डा. वकुल
जेवी जैन डिग्री कॉलेज प्राचार्य डॉ. वकुल बंसल का कहना है कि आज के समय में बेटियां आगे बढ़ रही हैं। शिक्षा का क्षेत्र हो या फिर खेल का मैदान। हर स्कूल-कॉलेज में को-एजुकेशन होना बहुत जरुरी है। दूरियां मन से होती है न की दूर करने से। इसलिए बेटियों को बेटों की तरह ही मानें।

लड़कियों को आगे बढ़ाया जाना जरूरी: प्राचार्य
महाराज सिंह कालेज के प्रचार्य डॉ. एके डिमरी ने कहा कि लड़के और लड़कियों के एक साथ पढ़ने में किसी तरह की बुराई नहीं है। लड़कियों को भी लड़कों की तरह ही आगे बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए। देश में ज्यादातर कालेज में लड़के और लड़कियां एक साथ ही पढ़ाई करती हैं।

को-एजुकेशन से बनता है फ्रैंडली माहौल: फराह फैज
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज का कहना है कि स्कूल कालेज में लड़का और लड़कियां एक साथ पढ़ेंगी तो उन्हें फ्रेंडली माहौल मिलेगा। यदि उन्हें एक दूसरे से दूर रखा जाएगा तो दोनों के बीच एक दूसरे के करीब आने की जिज्ञासा तेज होगी। जिससे वह हर समय एक दूसरे के पास आने की कोशिश करेंगे। स्कूल कालेज में एक साथ पढ़ाई करने से दोनों के बीच की दूरी कम होती है। जिससे अपराध भी कम होते हैं।

मदनी ने किया सहशिक्षा का विरोध
दिल्ली में सोमवार को जमीयत उलेमा-ए-हिन्द (अरशद मदनी गुट) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल होने चाहिएं। सह शिक्षा से अनैतिकता पैदा होने का खतरा रहता है। उन्होंने मुस्लिमों के साथ ही हिन्दुओं से भी सह शिक्षा में बच्चों को नहीं पढ़ाने का आह्वान किया। बैठक में को-एजुकेशन, मॉब लिचिंग, शिक्षा समेत अन्य महत्वपूर्ण  मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। बैठक के बाद जमीयत की ओर से जारी ब्यान में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मुस्लिम समाज के साथ-साथ गैर मुस्लिम भाइयों से भी अपने बच्चों को-एजूकेशन से दूर रखने को कहा। मौलाना ने कहा कि समाज को अनैतिकता से बचाने के लिए लड़की और लड़कों को अलग-अलग शिक्षा दिलाई जाए।
 

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