कोरोना के डेल्टा स्वरूप से जूझ रहे अमेरिका में सभी को टीके की बूस्टर डोज देने का फैसला !

वाशिंगटन
कोरोना के डेल्टा स्वरूप से जूझ रहे अमेरिका में सभी को टीके की बूस्टर डोज देने का फैसला जल्द हो सकता है। हालांकि टीके की बूस्टर डोज कब, किसे  लगेगी और इससे क्या होगा, इस पर वैज्ञानिकों ने कुछ तथ्य स्पष्ट किए हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, बूस्टर डोज का समय इस आधार पर तय होगा कि आपको टीके की दो डोज कब लगी थी। अभी स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि टीके की दूसरी डोज के आठ माह बाद तीसरी डोज लगाई जा सकती है। हालांकि इसके लिए अभी प्राथमिकता तय होनी है।

अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। संभव है कि दो डोज से उनके भीतर पूरी तरह इम्युनिटी नहीं बनी हो। ऐसे लोगों को दूसरी डोज के 28 दिन बाद ही टीके की तीसरी डोज लगेगी। जिनका इम्यून सिस्टम ठीक है उन्हें तीसरी डोज थोड़े ज्यादा समय बाद लगेगी।

अमेरिका में जिन लोगों ने सबसे पहले टीका लगवाया है, उन्हें सबसे पहले बूस्टर डोज लगेगा। इस अनुसार स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और बुजुर्गों के साथ गंभीर रोग से ग्रसित लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। कुछ बातें टीके की उपलब्धता पर भी निर्भर होगी।

बूस्टर डोज के तौर पर कौन सा टीका लगेगा, ये अभी स्पष्ट नही है। फिलहाल यही कहा जा रहा है कि जिसे जिस कंपनी का टीका पहले लगा है, उसे उसी कंपनी का टीका तीसरी डोज के तौर पर लगेगा। हालांकि इस पर अध्ययन जारी है कि क्या मिक्स डोज का इस्तेमाल हो सकता है जो सुरक्षित हो।

अमेरिका के मेयो क्लीनिक के डॉ. मेलानाइन स्विफ्ट का कहना है कि जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है, उन्हें महामारी के इस दौर में टीका लगवाना होगा। टीका संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खतरे से बचाता है। जितनी जल्दी टीका लगवाएंगे बूस्टर डोज उतनी जल्दी लगेगी।

वैज्ञानिकों ने देखा है कि टीके से बनी एंटीबॉडीज कुछ समय बाद कम होती है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होती है। संभव है कि बूस्टर डोज न लगे और संक्रमण हो जाए तो शरीर को वायरस से लड़ने में अधिक मेहनत करनी पड़े। डेल्टा स्वरूप को देख ऐसा ही लग रहा है।

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