उत्तम संतान और सुखों के लिए करें पवित्रा एकादशी व्रत

नई दिल्ली
श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पवित्रा एकादशी 18 अगस्त 2021 बुधवार को आ रही है। इस एकादशी के बारे में कहा जाता है किजो व्यक्ति शुद्ध अंत:करण से पवित्रा एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन करता है उसे वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। नि:संतान दंपती यदि जोड़े से इस एकादशी का व्रत करें तो उन्हें उत्तम गुणों वाली संस्कारवान संतान की प्राप्ति होती है। मतमतांतर के अनुसार इसे पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।
 
पवित्रा एकादशी के दिन प्रात:काल सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत होकर भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करें। उसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान विष्णु के समक्ष एकादशी व्रत का संकल्प लें। यदि किसी कार्य विशेष की पूर्ति के उद्देश्य से व्रत कर रहे हैं तो उसका मानस उच्चारण करें। इसके बाद समस्त द्रव्यों सहित पूजन करें। फलों-मिष्ठान्नों का नैवेद्य लगाएं। एकादशी व्रत की कथा सुनें। दिनभर निराहार रहें। सायंकाल के समय तुलसी माता के पौधे के समीप दीप प्रज्ज्वलित करें। फलाहार ग्रहण करें। दूसरे दिन द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में महिष्मति नगरी में महीजीत नामक राजा राज्य करता था। राजा धर्मात्मा, शांतिप्रिय तथा दानी होने के बाद भी निसंतान था। राजा ने एक बार ऋषियों को बुलाकर संतान प्राप्ति का उपाय पूछा। परमज्ञानी लोमेश ऋषि ने बताया किराजन आपने पिछले जन्म में सावन की एकादशी को अपने तालाब से प्यासी गाय को पानी नहीं पीने दिया था। उसी के परिणाम स्वरूप आप अभी तक निसंतान हैं। आप श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का नियमपूर्वक व्रत रखें तथा रात्रि जागकर करें। इससे तुम्हें अवश्य संतान की प्राप्ति होगी। ऋषि की आज्ञा से और बताई हुई विधि के अनुसार राजा और रानी ने व्रत किया और उन्हें उत्तम गुणों वाली संतान की प्राप्ति हुई।

एकादशी तिथि कब से कब तक
एकादशी तिथि प्रारंभ 17 अगस्त मध्यरात्रि बाद 3.20 बजे से
एकादशी तिथि पूर्ण 18 अगस्त को मध्यरात्रि बाद 1.05 बजे तक
व्रत का पारणा 19 अगस्त को प्रात: 6.32 से 8.39 बजे तक

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