सीम नेशनल एनर्जी मैनेजमेंट अवार्ड्स में वेदांता एल्युमीनियम ने लगाई हैट्रिक

कोरबा
भारत में एल्युमीनियम और इसके वैल्यू एडेड उत्पादों की सबसे बड़ी उत्पादक वेदांता एल्युमीनियम ने ओडिशा के झारसुगुड़ा में अपने एल्युमीनियम स्मेल्टर्स 1 एवं 2 और 1215 मेगावाट के कैप्टिव प्लांट में एनर्जी मैनेजमेंट के मामले में शानदार प्रदर्शन के लिए सीम नेशनल एनर्जी मैनेजमेंट अवार्ड्स (एसएनईएमए) 2020 में गोल्ड अवार्ड्स हासिल किया।

एल्युमीनियम स्मेल्टर वह संयंत्र होता है, जहां एल्युमीनियम आॅक्साइड या एलुमिना के इलेक्ट्रोलिटिक रिडक्शन के जरिये शुद्ध एल्युमीनियम प्राप्त किया जाता है। वेदांता झारसुगुड़ा के 1215 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट और 2400 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट ने आॅपरेशनल एक्सीलेंस के लिए थर्मल पावर प्लांट आॅपरेशन एंड मैंटेनेंस कॉन्फ्रेंस एंड अवार्ड्स 2021 भी जीता है। ऊर्जा के क्षेत्र में वेदांता की श्रेष्ठता पर वेदांता एल्युमीनियम बिजनेस के सीईओ राहुल शर्मा ने कहा कि 100 फीसद रिसाइकिल की जा सकने वाली धातु एल्युमीनियम के लिए भारत के सबसे बड़े उत्पादक के तौर पर हम सस्टेनेबेल डेवलपमेंट एवं जलवायु संबंधी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक हैं। हम इस दिशा में संसाधनों का न्यायसंगत प्रयोग, ऊर्जा दक्ष परिचालन और अक्षय ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग सुनिश्चित करने की तीन स्तर की रणनीति पर काम करते हैं। हमने ऊर्जा एवं संसाधनों के प्रयोग में वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाया है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में नवीनतम समाधानों का प्रयोग किया है। हम ग्रीन मेटल एल्युमीनियम के उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के यथासंभव विकल्पों के प्रयोग की दिशा में भी प्रयासरत हैं।

एनर्जी मैनेजमेंट वेदांता एल्युमीनियम के क्लाइमेट एक्शन रोडमैप के केंद्र में है और संसाधनों एवं प्रक्रियाओं की सर्वोच्च परिचालन दक्षता प्राप्त करने की दिशा में समर्पित प्रयासों के तहत इसका समाधान तलाशा जाता है। क्लाइमेट संबंधी फाइनेंशियल डिस्क्लोजर पर गठित टास्क फोर्स (टीसीएफडी) की सिफारिशों के अनुरूप और वेदांता ग्रुप के कार्बन फोरम के निर्देश के अनुसार वेदांता एल्युमीनियम अपनी कार्बन मैनेजमेंट प्रक्रियाओं को टीसीएफडी फ्रेमवर्क के अनुरूप संचालित करने की दिशा में काम कर रही है। इसमें उत्पादन प्रक्रियाओं में विशेष ऊर्जा प्रयोगों को बेहतर करने के लिए प्रभावी पहल करना और लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए कम कार्बन उत्सर्जन वाले ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग पर फोकस करना शामिल है।

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