सहकारी संस्थाओं में नवीन सदस्य नहीं बना पाएंगे प्रशासक, कसा शिकंजा

भोपाल
प्रदेश की सहकारी संस्थाओं के प्रशासकों पर राज्य सरकार ने शिकंजा कस दिया है। अब प्रशासक सहकारी संस्थाओं में नवीन सदस्य नहीं बना पाएंगे। पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने इस संबंध में सभी संस्थओं को निर्देश जारी कर दिए है। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रशासकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

आयुक्त सहकारिता नरेश पाल के पास भी इस संबंध में शिकायत पहुंच रही थी। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 49 (सात ख), 53(1)और 53(12)के अंतर्गत विभिन्न सहकारी संस्थाओं में नियुक्त किए गए प्रशासकों द्वारा संस्थाओं में व्यक्तिगत सदस्यता प्रदान किए जाने को लेकर मांगी जा रही अनुमतियों के संबंध में आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि केवल उपभोक्ता और संसाधन समितियों को छोड़कर अन्य सभी वर्गों की सहकारी समितियों में नवीन सदस्य बनाए जाने का अधिकार प्रशासक को नहीं होगा। ऐसा केवल निर्वाचित संचालक मंडल की मंजूरी के बाद ही किया जा सकेगा। इस आदेश का उल्लंघन कर व्यक्तिगत सदस्य बनाने वाले प्रशासकों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।

सहकारिता आयुक्त कार्यालय में प्रदेश भर से रोजाना अलग-अलग संस्थाओं के प्रशासक परामर्श मांग रहे थे कि कुछ लोग व्यक्तिगत सदस्यता मांग रहे है। जो निर्देश पहले जारी है उनमें स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि क्या किया जाए। कई प्रशासकों ने तो अपने स्तर पर निर्णय लेकर ही संस्थओं में व्यक्तिगत सदस्य भी बना डाले। सदस्यता को लेकर जिलों में विवाद की स्थिति भी बन रही थी। जो अन्य व्यक्ति सहकारी संस्थाओं में सदस्य नहीं बन पा रहे थे वे बनाए गए सदस्यों का उल्लेख कर आपत्ति दर्ज करा रहे थे।

सहकारिता आयुक्त के इस आदेश के बाद सहकारी संस्थाओं मे गुपचुप व्यक्तिगत सदस्यता दिए जाने की प्रक्रिया पर रोक लग गई है। उपभोक्ता समितियों के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ता भंडार, जिला उपभोक्ता संघ, थोक उपभोक्ता भंडार और संसाधन समितियों के अंतर्गत आने वाली पैक्स, डीसीबी और अपेक्स बैंक में ही प्रशासक अपने स्तर पर नवीन व्यक्तिगत सदस्य बना सकेंगे।

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