देश में हफ्ते भर में ही कोरोना संक्रमण का पॉजिटिविटी रेट दोगुना हुआ

 नई दिल्ली 
देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति अभी मोटे तौर पर बहुत गंभीर नहीं है। हालांकि दो तथ्य चिंता पैदा करते हैं। पहला तो ये कि संक्रमण से होने वाली मौतों की गिनती अब भी 500 के आसपास बनी हुई है और दूसरी ये कि संक्रमण की दर एक सप्ताह के भीतर ही दोगुनी हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार को जांच पॉजिटिविटी दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। जबकि एक सप्ताह पहले यह दर 1.68% थी। यह संख्या अभी बहुत चिंताजनक नहीं है मगर घटने की बजाए इसका बढ़ना चिंताजनक है। अगर यह ट्रेंड आगे बढ़ा तो यह तीसरी लहर का साफ संकेत हो सकता है।

जब कोरोना की दूसरी लहर चरम पर थी तब देश में संक्रमण दर 18 से 20 फीसदी तक पहुंच गई थी। दूसरी लहर मंद पड़ने पर संक्रमण दर घटते-घटते 20 जुलाई को मात्र डेढ़ फीसदी रह गई थी। पर बीते छह दिनों के दौरान संक्रमण दर धीरे-धीरे बढ़ती गई और यह 26 जुलाई को जारी आंकड़ों के मुताबिक यह 1.68% हो गई। गौरतलब है कि देश के आठ राज्य अभी ऐसे हैं जहां संक्रमण दर 5 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।

लगातार बढ़ रहा पॉजिटिविटी ग्राफ
टेस्‍ट पॉजिटिविटी की बात करें तो देश में 20 जुलाई को यह 1.68 फीसदी थी. 21 जुलाई को यह बढ़कर 2.27 फीसदी हो गई. 22 जुलाई को यह 2.40 हो गई. 23 जुलाई को यह 2.12 और 24 जुलाई को यह बढ़कर 2.4 हो गई. वही अब 26 जुलाई को यह 3.40 रिकॉर्ड की गई है.
 
इससे पहले एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी और कितनी बुरी होगी, यह हमारे व्यवहार पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि कोविड अनुरुप व्यवहार, भीड़ से बचने, वैक्सीन लगवाने से इसमें देरी होगी और तीव्रता कम होगी. डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि यह मानव व्यवहार पर निर्भर है. वायरस कैसे व्यवहार करेगा, हम भविष्यवाणी नहीं कर सकते. हालांकि एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने इस दौरान स्कूलों को खोलने की भी सिफारिश की है. उन्होंने कहा, 'ये कहना मुश्किल है की तीसरी लहर कब आएगी. जहां पॉजिटिविटी रेट बहुत कम है, हम वहां स्कूल खोल सकते हैं. हमें ग्रेडेड मैनर में स्कूल खोलने चाहिए.' उन्होंने यह भी कहा कि मेरा मानना है कि देश में बच्चों के लिए सितंबर तक वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी.

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