प्रदेश मे 6.45 लाख टन गेहूं बेचने करना पड़ रहा भारी मशक्कत

भोपाल
प्रदेश मे 6.45 लाख टन पुराना गेहूं बेचने सरकार को भारी मशक्कत करना पड़ रहा है। इसमें से दो लाख टन गेहूं बेचने के लिए जारी पहले टेंडर में एक मात्र आईटीसी कंपनी शेष रह जाने के बाद अब राज्य सरकार ने टेंडर निरस्त कर अब फिर नये सिरे से टेंडर करने की तैयारी कर ली है।

पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश सरकार ने प्रोत्साहन राशि देकर ज्यादा गेहूं खरीद लिया था। इसके चलते केन्द्र सरकार ने 6.45 लाख टन गेहूं केन्द्रीय पूल में लेने से इंकार कर दिया था। केन्द्र सरकार का कहना था कि कांग्रेस सरकार ने अधिक गेहूं खरीदने के लिए किसानों को 160 रुपए क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी है इसलिए ज्यादा खरीदा गया गेहूं अब सेंट्रल पूल में नही लिया जाएग। इसके चलते  इस गेहूं को बेचने के लिए राज्य सरकार ने टेंडर जारी किया था। पहले चरण में कुल दो लाख मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री के  टेंडर जारी किए थे। 1840 रुपए क्विंटल की दर से खरीदे गए इस गेहूं को बेचने के लिए सरकार ने रिजर्व प्राईज 1580 रुपए प्रति क्विंटल रखी थी। टेंडर में दो कंपनियों ने रुचि दिखाई। बाद में एक कंपनी ने अपनी निविदा वापस ले ली। इसके बाद केवल आईटीसी कंपनी ही गेहूं खरीदने के लिए मैदान में शेष रह गई।

केवल एक ही कंपनी के मैदान में शेष रह जाने और नीलामी प्रक्रिया से बाहर हुई कंपनियों द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम की नीलामी की शर्तों को न्यायालय में चुनौती दिए जाने के बाद अब नागरिक आपूर्ति निगम ने नीलामी प्रक्रिया निरस्त कर दी है। अब नए सिरे से फिर से नीलामी के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी है। टेंडर की शर्तों में अब सरकार कुछ बदलाव करने जा रही है।

 

वर्ष 19-20 के 6 लाख 45 हजार मीट्रिक टन गेहूं की नीलामी होना है। पहले जारी टेंडर निरस्त कर अब नए सिरे से टेंडर करने की तैयारी है। जल्द ही टेंडर फिर जारी किए जाएंगे।
अभिजीत अग्रवाल, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम

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