जबलपुर में प्रस्तावित स्पोर्टस सिटी के निर्माण पर HC की रोक , सिर्फ डुमना एयरपोर्ट विस्तारीकरण को छूट

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर में प्रस्तावित प्रदेश की सबसे बड़ी ग्रीन स्पोर्ट्स सिटी के निर्माण पर रोक लगा दी है। यह स्पोर्ट्स सिटी डुमना एयरपोर्ट के पास बन रही थी। हाईकोर्ट ने अन्य सभी निर्माण को नर्मदा पार ले जाने पर विचार करने का आदेश दिया है और खंदारी जलाशय के जल ग्रहण क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने जबलपुर संभागायुक्त और कलेक्टर को इस आदेश का पालन कराने का दायित्व सौंपा है। अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी।

मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक, जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि डुमना के खंदारी जलाशय के जल ग्रहण क्षेत्र में आवंटित या प्रस्तावित प्रोजेक्ट को वैकल्पिक स्थानों पर ले जाने के लिए विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा जबलपुर को भी इंदौर, भोपाल की तरह विकास की जरूरत है, लेकिन विकास के लिए पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि डुमना वन्य क्षेत्र और वहां के वन्य प्राणियों का संरक्षण जबलपुर के हित में है।

एयरपोर्ट विस्तारीकरण के कार्यों को दी छूट

हाईकोर्ट ने आदेश में सिर्फ 1212 एकड़ में हो रहे डुमना एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के कार्यों को छूट देने का आदेश दिया है। एयरपोर्ट के पिपरिया साइड में 124 एकड़ में लॉ यूनिवर्सिटी, गधेरी साइड में 40 एकड़ में ग्रीन स्पोर्ट्स सिटी, 17 एकड़ में MP शासन सूचना एवं प्रौद्योगिकी, 59 एकड़ में ज्यूडिशियल अकादमी, 5 एकड़ में लोकायुक्त का भवन, 247 एकड़ में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण संस्थान, 10 एकड़ में जजेस बंगलों, 20 एकड़ में फूड क्रॉफ्ट इंस्टीट्यूट, 110 एकड़ रेलवे को आवंटित हुआ था। इस आदेश से सभी निर्माण कार्य प्रभावित होंगे।

नर्मदा पार ले जाने का दिया सुझाव

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि एयरपोर्ट को छोड़कर अन्य सभी निर्माण को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की जरूरत है। हाईकोर्ट ने नर्मदा के पार इन प्रोजेक्ट को ले जाने का भी सुझाव दिया है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके कौरव, उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और नगर निगम की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह ने पक्ष रखा।

ये है मामला

सांसद राकेश सिंह ने डुमना एयरपोर्ट के पीछे 40 एकड़ में प्रदेश का सबसे बड़ा ग्रीन स्पोर्ट्स सिटी की परिकल्पना की थी। इसके लिए मंजूरी भी दिला चुके थे। कांग्रेस ने इसे जहां मुद्दा बनाया। वहीं कुछ अन्य पर्यावरणविद भी सक्रिय हो गए। नेपियर टाउन निवासी जगतजाेत सिंह फ़्लोरा और अन्य की ओर से लगाई गई याचिका पर कोर्ट ने उक्त आदेश दिया है।

याचिका के साथ तालाबों के संरक्षण के लिए वर्ष 1997 में दायर गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ की याचिका में 2015 में पेश की गई एनवायरमेंट प्रोटक्शन एंड कोऑर्डिनेशन आर्गेनाइजेशन (ऐपको) रिपोर्ट को भी पेश किया गया। इसमें कहा गया है कि खंदारी जलाशय के कैचमेंट एरिया को संरक्षित किया जाए और इस क्षेत्र में पौधारोपण किया जाए।

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