पंद्रह बार चला चुकी भर्ती अभियान, आठ साल में नहीं भर पाई सरकार निशक्तजनों के पद
भोपाल
प्रदेश के सरकारी महकमों में नि:शक्तों के लिए आरक्षित रिक्त पदों को सरकारी विभाग आठ साल में भी नहीं भर पाए है। इसके चलते इन पदों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान को सोलहवी बार एक साल के लिए बढ़ाया गया है। अब तीस जून 2022 तक इन पदों को भरने की कवायद की जाएगी।
वर्ष 2013 में नीलेश सिंघल विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के प्रकरण में हाईकोर्ट ने नि:शक्तजनों के पदों को नहीं भरे जाने पर न्यायालय की अवमानना का प्रकरण लगाया था। उसके बाद राज्य सरकार ने इन पदों को भरने वर्ष 2014 में विशेष भर्ती अभियान चलाया था। तब से पंद्रह बार राज्य सरकार नि:शक्तों के लिए आरक्षित पदों को भरने विशेष भर्ती अभियान चला चुकी है। अभी भी राज्य सरकार सामान्य प्रशासन विभाग को अलग-अलग जिलों से शिकायत मिल रही थी कि नि:शक्तजनों के लिए आरक्षित रिक्त पदों की पूर्ति नहीं हो पा रही है। इन पदों की पूर्ति विशेष भर्ती अभियान के तहत वाक इन इंटरव्यू के माध्यम से किए जाने के निर्देश जारी किए गए थे।
इसके लिए चलाए गए विशेष भर्ती अभियान की समयसीमा तीस जून 2021 को समाप्त हो रही थी। अब सरकार ने एक बार फिर तीस जून2022 तक विशेष भर्ती अभियान चलाकर इन पदों को भरने का निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी विभागों,राजस्व मंडल,विभागाध्यक्षों,संभागायुक्त,कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी कर नि:शक्तजनों के लिए अलग-अलग श्रेणियों मेें आरक्षित पदों को भरने के निर्देश दिए है।
दृष्टिबाधित और कम दृष्टि, बहरे और कम सुनने वाले, लोकोमोटर डिसेबिलिटी जिसमें सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग मुक्त, बौनापन, एसिड अटैक पीड़ित, मस्कुलर डिस्ट्राफी, आॅटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, स्पेसिफिक लर्निंग, डिसेबिलिटी, मानसिक बीमारी और बहुविकलांगता से पीड़ित व्यक्ति।
