भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच इलेक्ट्रॉनिक अनुबंध से घटेंगे विवाद

भोपाल
प्रदेश में भूमिस्वामी और बटाईदार के बीच अब इलेक्ट्रानिक अनुबंध होगा। इसके अपलोड होने के बाद इसमें जो भी परिवर्तन होंगे वह साफ दिखाई देंगे, इससे अनुबंध के बाद बटाईदार और भूमिस्वामी के बीच होने वाले विवादों में भी कमी आएगी।

राज्य सरकार ने भूमिस्वामी और बटाईदारों के हितों के संरक्षण के लिए नये नियम बनाए है। लेकिन इन नियमों का लाभ तभी मिल पाता है जब दोनों के बीच लिखित अनुबंध हो। इसके लिए दोनो पक्षों की व्यक्तिगत मौजूदगी आवश्यक होती थी। तभी यह अनुबंध नोटरी के बाद वैधानिक अनुबंध का दर्जा हासिल कर पाता था। लेकिन वर्तमान में कोरोना महामारी का संक्रमण खत्म नहीं हो पाया है। इसके चलते लोग अनुबंध कराने नहीं आ पा रहे थे। इसको देखते हुए नियमों में बदलाव कर अब इस अनुबंध को इलेक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत किए जाने की छूट सरकार देने जा रही है।

अनुबंध की स्कैन की हुई प्रति वेबपोर्टल के माध्यम से ऐसे अनुबंध के दोनो पक्षकारों द्वारा आॅनलाईन प्रस्तुत की जा सकेगी। भूमि के ब्यौरे एमपी भूलेख पोर्टल से प्राप्त किए जाएंगे। ऐसे अनुबंध का आॅनलाईन प्रस्तुतिकरण  दोनो पक्षकारों के इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षरों के साथ किया जाएगा। अनुबंध प्रस्तुत किए जाने पर तत्काल इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर से पावती जारी होगी कोई भी पक्षकार ऐसी पावती का प्रिंटआउट भी ले सकेगा। अनुबंध पोर्टल पर ग्राम और तहसीलवार स्वत: ही प्रदर्शित हो जाएंगे।

इन अनुबंधों के होने से बटाईदार और भूमिस्वामी के बीच होने वाले विवादों में कमी आएगी। विवादों के निपटारे के लिए भू राजस्व संहिता के तहत निर्णय होगा। तहसीलदार इस संबंध में कोई भी आदेश पारित करने से पहले हर पक्षकार को सुनवाई का मौका देगा।

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