छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर मानवाधिकार आयोग हुआ सख्त
भोपाल
प्रदेश के छात्रावासों, आश्रमों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के शारीरिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और शारीरिक शोषण, पास्को एक्ट के उल्लंघन को मानवाधिकार आयोग और चाइल्ड राईट्स संस्था ने नाराजगी जताई है। इसके बाद प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए है कि छात्रावासों में महिला डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जाए जो हर सप्ताह छात्राओं का मेडिकल टेस्ट करे, इसके अलावा प्रशिक्षित काउंसलर की तैनाती भी की जाए।
प्रमुख सचिव ने आयुक्त जनजातीय विकास को प्रदेश के सभी आश्रम, छात्रावासों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए चौदह बिन्दुओं का पालन कराने को कहा है। इसमें कहा गया है कि सभी आश्रम, छात्रावासों में कुशल, प्रतिष्ठित और नैतिक आरचण वाले व्यक्त्यिों को ही प्रभार दिया जाए। इनका नियमित जिले के वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण करें। स्कूल के प्रधान अध्यापक, प्राचार्य भी छात्रावासी विद्यार्थियों से नियमित संपर्क कर उनकी समस्याएं जाने। आश्रम, छात्रावासों में नियमित पर्यवेक्षण, निरीक्षण और कर्त्तव्य का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए। संस्थाओं में रह रहे नाबालिग छात्रों के साथ मानसिक और शारीरिक शोषण करने वाले व्यक्तियों पर कार्यवाही की जाए। आश्रम छात्रावासों में दूरभाष सुविधा उपलबध कराएं। पीड़ितों को पांच-पांच हजार की क्षतिपूर्ति दी जाए।
बच्चों का शारीरिक, लैंगिक शोषण होंने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, अध्यापक इसकी सूचना थाने और बाल कल्याण अधिकारी को दे। मंदबुद्धि और नि:शक्त छात्र-छात्राएं रहती है उनका नियमित निरीक्षण, पर्यवेक्षण करने टीम गठित करे जो निरीक्षण करे और बच्चों से चर्चा करे। जन्मतिथि रजिस्टर में छेड़छाड़ नहीं हो। इसके लिए माता-पिता द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों का प्रमाण ही मान्य करें। इन सभी निर्देशों का पालन कराने को कहा गया है।
