विदेश मंत्री जयशंकर का बयान, कहा- कोरोना एक आपदा है, ट्रिप्स छूट जरूरी
नई दिल्ली
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की ओर से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के भविष्य पर आयोजित एक ऑनलाइन सेशन में हिस्सा लिया। इस दौरान पुर्तगाली विदेश मंत्री ऑगस्टो सैंटोस सिल्वा ने कहा कि यूरोप बौद्धिक संपदा अधिकारों में छूट (ट्रिप्स) करने के खिलाफ है और यह अंतिम उपाय होना चाहिए, जिस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि महामारी ने एक ऐसी स्थिति पैदा की है, जिसमें इसकी जरूरत है।
पुर्तगाली मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा लाए गए छूट प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और यूरोपीय संघ भी संयुक्त राज्य अमेरिका के एक प्रस्ताव के इंतजारमें है। आईपीआर को माफ करना एक अंतिम उपाय है। हम इस पर चर्चा कर रहे हैं। अलग-अलग विचार हैं और हम अभी भी अमेरिका के एक प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि यह एक अस्थायी आईपीआर छूट का समर्थन करेगा, लेकिन पहले कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया गया है। जिसका जवाब देते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि इस प्रस्ताव में यूरोप महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई आपूर्ति चैनल यूरोप से होकर जाते हैं। जयशंकर ने कहा कि जब भारत और दक्षिण अफ्रीका ने प्रस्ताव लाया, तो हम व्यापक वैश्विक हित के लिए बोल रहे थे। हमारा मानना है कि अन्य लोग भी उस सोच का समर्थन करते हैं।
इस ऑनलाइन सेशन में दोनों विदेश मंत्रियों ने चीन पर बात की, जहां ऑगस्टो सैंटोस सिल्वा ने बताया कि चीन एक चुनौती है खतरा नहीं है, लेकिन मानवाधिकारों के मुद्दों पर यूरोपीय संघ भारत चीन को अपना भागीदार मानता है। यूरोप चीन द्वारा हांगकांग में घरेलू स्थान को घेरने, दक्षिण चीन सागर में उसकी आक्रामकता, ताइवान के साथ उसके संबंधों और चीन शिनजियांग में क्या कर रहा है, इस पर चुप नहीं हो सकता। लेकिन यह एक भागीदार भी है क्योंकि चीन के बिना पेरिस समझौते के वैश्विक लक्ष्य पूरे नहीं होंगे। वहीं जयशंकर ने कहा कि हम बहुत अलग-अलग जगहों से आते हैं और भारत चीन के साथ अपनी सीमा साझा करता है। मेरे पास मेरी सेना है जो सीमा के ठीक ऊपर है। मुझे लगता है कि मेरी स्थिति यूरोप से बहुत अलग है। इसके साथ ही विदेश मंंत्री जयशंकर ने भारत-यूरोपीय संघ के छह महीने के उल्लेखनीय संबंधों के लिए पुर्तगाल के विदेश मंत्री को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के सभी नेताओं के बीच हमारी एक बहुत ही महत्वपूर्ण वर्चुअल शिखर बैठक थी। हमने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए। एक व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत को फिर से शुरू करना है।
ट्रिप्स छूट क्या है?
ट्रिप्स विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत सभी सदस्य देशों को कवर करने वाला एक वैश्विक समझौता है। यह पेटेंट, बौद्धिक संपदा अधिकारों पर एक समझौता है। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने छूट की मांग की ताकि विकसित देशों द्वारा बनाए गए टीकों और दवाओं की खरीद विकासशील देशों के लिए आसान हो जाए। यूरोपीय संघ ने अब तक इस प्रस्ताव का विरोध किया है।
