16 जिलों में मध्याह्न भोजन के टास्क मैनेजर, मनरेगा के कन्वर्जेंस से प्रदेश भर में बनेगी ‘मां की बगिया’
भोपाल
प्रदेशभर में अब ‘मां की बगिया’ मनरेगा के कनवर्जेंस से तैयार की जाएंगी। इसके जरिए ग्रामीण अंचलों में रहने वाले स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन में ताजी सब्जियां मिल सकेंगी। ये ‘मां की बगिया’ सभी सरकारी स्कूलों और ग्रामीण अंचलों में बनाई जा रही है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने वर्ष 20-21 में स्वीकृत ‘मां की बगिया’ (पोषण वाटिका) की राशि एक सप्ताह में जारी करने के निर्देश दिए है। मनरेगा से ज्यादा से ज्यादा कन्वर्जेंस कराते हुए ‘मां की बगिया’ तैयार कराने के निर्देश भी उन्होंने दिए है। प्रदेश के सभी स्कूली बच्चों में आने वाले बच्चों को मध्याह्न भोजन में ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए सभी स्कूलों में ‘मां की बगिया’ शुरू की जा रही है।
इन पोषण वाटिकाओं में तरह-तरह की हरी सब्जियां लगाई जा रही है। इन पोषण वाटिकाओं को तैयार करने और इनकी देखरेख करने के लिए मनरेगा के कन्वर्जेंस से राशि खर्च की जाएगी। इससे बच्चों को भोजन में रोजाना ताजी पौष्टिक सब्जियां मिल सकेंगी।
प्रदेश के 16 जिलों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत टास्क मैनेजर, क्वालिटी मॉनिटर के पद खाली पड़े हुए है इससे मध्याह्न भोजन का काम, इसकी गुणवत्ता नियंत्रण का काम प्रभावित हो रहा है। जिलों के प्रभारी अधिकारियों ने मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत टास्क मैनेजर, क्वालिटी मॉनिटर नियुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। इस पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने रिक्त पदों पर अधिकारियों की तैनाती करने के लिए राज्य स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है ताकि इन रिक्त पदों को तत्काल भरा जा सके।
