द ग्रेट चायनीज लोन ट्रैप: दुनिया के 58 देशों को चीन ने कैसे ‘गुलाम’ बना लिया?
नई दिल्ली
चीन द्वारा दुनिया के अलग-अलग देशों को दिया गया लोन आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक द्वारा दिए गये लोन को जोड़ दें, तो उससे भी ज्यादा हो जाता है। 2020 में आई रिपोर्ट के मुताबिक चीन अब तक करीब 5.6 ट्रिलियन डॉलर का लोन बांट चुका है, जो भारत की जीडीपी का करीब करीब दो गुना है और विश्व में द्विपक्षीय संबंधों को तहत बांटे गये कुल लोन का 65 प्रतिशत है। 2017 में चायनीज सरकार द्वारा जारी एक व्हाइट पेपर के मुताबिक चीन ने अपने लोन को 'इंटरनेशनल डेवलपमेंट कॉपरेशन' कहा है, जो उसके साउथ-साउथ कॉपरेशन का हिस्सा है और चीन अपने इस लोन को 'वैश्विक समुदाय का जिम्मेदार देश' होने का कर्तव्य बताता है। लेकिन, असलियत इससे काफी अलग है और सच्चाई इससे काफी जुटा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि चीन ने विश्व के 58 देशों को अपने कर्ज के जाल में पूरी तरह से जकड़ लिया है, जिनमें पाकिस्तान और श्रीलंका भी शामिल हैं।
ब्लॉग में लिखा है कि '' चीन जो कर्ज देता है, उसे वो वैश्विक कल्याण के वास्ते दिया गया कर्ज बताता है और कहता है कि उसका लोन बांटने का मकसद विश्व में सार्वजनिक तौर पर अच्छा काम करना है और वो एक वैश्विक समुदाय का जिम्मेदार देश होने के नाते ऐसा कर रहा है, लेकिन अगर आप चीन द्वारा बांटे गये लोन की प्रकृति को देखेगें, तो पाएंगे कि चीनी कर्ज में अपारदर्शिता और हिंसा का समावेश है, जो उधार लेने वाले देशों के लिए एक फंदे से कम नहीं है। चीन जिस तरह से लोन बांटता है और दो शर्तें लगाता है, उनसे छोटे देशों में आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है और वहां की राजनीति को चीन अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करने लगता है और फिर उस देश की संप्रुभता ही खतरे में आने लगती है। इसके अलावा चीन जो लोन बांटता है, उसका करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कॉमर्शियल रहता है और उसमें किसी भी तरह की कोई छूट नहीं रहती है, जो उस देश की डेवपलमेंट असिस्टेंस के नाम पर एक छल है।
