अब फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन पर क्यों उठ रहे सवाल? 

 नई दिल्ली 
ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के बाद अब फाइजर और मॉडर्ना के कोविड-19 टीके भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। अमेरिका और इजरायल में इन दोनों ही कंपनियों की ओर से विकसित वैक्सीन लगवाने वाले युवाओं में सीने में जलन की समस्या उभरने के कई मामले सामने आए हैं। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक, 31 मई तक 16 से 24 साल के लाभार्थियों में फाइजर या मॉडर्ना के टीके की दूसरी खुराक लगवाने के बाद ‘मायोकार्डाइटिस’ या ‘पेरिकार्डाइटिस’ के 275 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि, विशेषज्ञों ने ऐसी दस से 102 शिकायतें मिलने की संभावना जताई थी। सीडीसी इन मामलों की जांच में जुटी है। ‘मायोकार्डाइटिस’ या ‘पेरिकार्डाइटिस’ में हृदय या उसके आसपास की मांसपेशियों में सूजन आने से सीने में जलन की समस्या सताने लगती है।

सीडीसी के अनुसार, 30 साल या उससे कम उम्र के लाभार्थियों की बात करें तो ‘मायोकार्डाइटिस’ या ‘पेरिकार्डाइटिस’ के 475 मामले दर्ज किए गए। 81 फीसदी मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि, 31 मई तक 15 को छोड़ सभी ठीक होकर घर लौट चुके थे। सीडीसी ने बताया कि ‘मायोकार्डाइटिस’ या ‘पेरिकार्डाइटिस’ के ज्यादातर शिकार पुरुष थे। उनमें फाइजर या मॉडर्ना के एम-आरएनए आधारित टीके की दूसरी खुराक लगवाने के दो से तीन दिन के भीतर इन बीमारियों के लक्षण उभरे। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्री ने भी फाइजर और मॉडर्ना का टीका लगवाने वाले युवाओं के ‘मायोकार्डाइटिस’ या ‘पेरिकार्डाइटिस’ की जद में आने का खुलासा किया था। यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी भी ऐसी शिकायतों की जांच कर रही है।
 
यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी के मुताबिक एस्ट्राजेनेका का ‘वैक्सजेवेरिया’ टीका लगवाने वाले छह लोग ‘कैपिलरी लीक सिंड्रोम’ का शिकार हो चुके हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। यूरोपीय संघ, लिचेंस्टीन, आइसलैंड, नॉर्वे और ब्रिटेन में ‘वैक्सजेवेरिया’ की 7.8 करोड़ से अधिक खुराक लगाई जा चुकी है। इससे पहले, यूरोप और ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका का टीका लगवाने वाले कई लाभार्थियों में खून के थक्के जमने की शिकायत दर्ज की गई थी। स्वास्थ्य एजेंसियों ने क्लॉटिंग की समस्या से जूझ रहे लोगों को एस्ट्राजेनेका का टीका लगवाने से बचने की सलाह दी थी।

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