अमेरिका ने चीन पर एक बार फिर बनाया पारदर्शी जांच का दबाव, कैसे फैला कोरोना वायरस? 

 वॉशिंगटन 
कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर से चीन पर दबाव बनाया है। कोरोना वायरस पर वॉइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि दुनिया को कोरोना महामारी की जड़ का पता लगाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन को निश्चित जवाब तक पहुंचने के लिए और भी प्रयास करने की जरूरत है।

ऐंडी स्लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'हमें इस महामारी की जड़ तक पहुंचना होगा और चीन को इसके लिए पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। हम चाहते हैं कि डब्लूएचओ इस मामले में मदद करे। हमें नहीं लगता कि ऐसा अभी हो रहा है। परिणाण कुछ भी हो लेकिन अभी सबसे ज्यादा जरूरी इस बीमारी की जड़ का पता लगाना है।' बता दें कि यह बयान अमेरिकी अखबार वॉलस्ट्रीट जर्नल की उस रिपोर्ट के कुछ दिन बाद ही आया है जिसमें दावा किया गया था कि चीन में कोरोना महामारी का पहला मामला दर्ज होने से एक महीने पहले नवंबर 2019 में ही वुहान लैब के शोधकर्ता बीमार पड़े थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन शोधकर्ताओं में कोरोना जैसे लक्षण थे। इस रिपोर्ट के बाद एक बार फिर कोरोना वायरस के चीन की लैब से निकलने के दावे को बल मिल गया। 

हालांकि, इस साल की शुरुआत में चीन पहुंची डब्लूएचओ की टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वायरस के लैब से निकलने की आशंका न के बराबर है। चीन ने डब्लूएच की टीम को रॉ डेटा देने से भी इनकार कर दिया था। चीन पर आरोप है कि उसने महामारी की शुरुआत के बाद महीनों तक अंतरराष्ट्रीय जांच में देरी की। इतना ही नहीं आरोप यह भी है कि उसने लैब की जांच से पहले ही वर्चुअली लैब की इस तरह सफाई की ताकि सारे सबूत मिट सकें।

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