पटना के 5 श्मशान घाटों पर 50 दिन में जले 2841 कोविड शव
पटना
दूसरी लहर में हुई मौतों के भयावह आंकड़े श्मशान घाट पर हुए दाह संस्कार बयां कर रहे हैं। कोविड शवों की संख्या इन दिनों छह से सात गुना तो सामान्य मतलब नॉन कोविड शवों की संख्या दो से तीन गुना बढ़ गई। इसका प्रमाण यह है कि पटना के पांच श्मशान घाट पर पिछले 50 दिनों में 2841 कोविड शव जलाए गए हैं। इससे भी ज्यादा सामान्य नॉन कोविड के 3247 शवों का दाह संस्कार हुआ। इसके अलावा मनेर के हल्दी छपरा, फतुहा और बाढ़ उमानाथ में भी रोजाना 20 से 25 कोविड शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इस तरह पटना के बाहर के घाटों पर रोजाना 20 के हिसाब से 50 दिन में करीब एक हजार कोविड शव जले। अलग-अलग कब्रिस्तानों में भी कोविड शव दफनाए गए हैं।
मार्च में कोविड के 217 और सामान्य 713 शवों का अंतिम संस्कार हुआ तो अप्रैल में इसकी संख्या बढ़कर क्रमश: 1489 और 2018 हो गई है। यानी मार्च की तुलना में कोविड शवों की संख्या सात गुणा और नॉन कोविड की तीन गुणा बढ़ गई। ये आंकड़े बता रहे हैं कि मौतें अब भी कम नहीं हो रही हैं। बस फर्क यह है कि पहले सिर्फ बांसघाट पर कोविड शव जलाए जाते थे, अब राजधानी के पांच घाटों पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था होने से कतार छोटी हो गई है। जब सिर्फ बांसघाट पर कोविड शव जलाए जाते थे तब मार्च महीने में 217 कोविड शव दाह संस्कार के लिए पहुंचे। अप्रैल में यह संख्या चार गुणा से ज्यादा होकर 939 हो गई। इसी माह में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। 20 मई तक 704 शव जलाए जा चुके हैं। वहीं, गुलबी घाट पर मार्च में एक भी कोविड शव नहीं जला जबकि अप्रैल में 441 और मई में अभी तक 516 कोविड शव जले हैं। खाजेकलां घाट पर करीब तीन महीने में 241 कोविड शव जलाए गए हैं।
